पुस्तक मेले के थीम मंडप में सशस्त्र बलों की विरासत का प्रदर्शन

पुस्तक मेले के थीम मंडप में सशस्त्र बलों की विरासत का प्रदर्शन

  •  
  • Publish Date - January 18, 2026 / 04:58 PM IST,
    Updated On - January 18, 2026 / 04:58 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में थीम मंडप के तहत सशस्त्र बलों की विरासत को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें देहरादून स्थित प्रतिष्ठित आईएमए भवन को समर्पित एक सुसज्जित प्रवेश द्वार, परम वीर चक्र प्राप्तकर्ताओं के बारे में जानकारी देता एक गलियारा और ‘वीआर’ तकनीक की मदद से एक स्वदेशी विमानवाहक पोत की आभासी सैर शामिल है।

यह मंडप मेले के मुख्य विषय ‘भारतीय सैन्य इतिहास : 75 साल का शौर्य और ज्ञान’ को दर्शाता है। इसकी एक दीवार पर लगा विशाल पैनल आजादी के बाद से भारत की प्रमुख सैन्य घटनाओं को चित्रित करता है, जिसमें 1947 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक की अवधि शामिल है।

नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2026 दस से 18 जनवरी तक भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इसमें ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का जश्न मनाया गया। हालांकि, इस विशाल स्थल के एक बड़े हॉल में निर्मित थीम मंडप बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर रहा है।

आगंतुक लाल और सफेद प्रवेश द्वार से थीम मंडप में प्रवेश करते हैं, जो प्रसिद्ध ‘चेटवुड बिल्डिंग’ की याद दिलाता है। ‘चेटवुड बिल्डिंग’ देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की मुख्य इमारत है। मंडप के दूसरे छोर पर रखी किताबें खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के ‘सूडान ब्लॉक’ के प्रति सम्मान व्यक्त करती हैं।

भारत के सैन्य इतिहास, दोनों विश्व युद्धों के दौरान इसके योगदान, नौसेना की विरासत, विमानवाहक पोतों, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और सामरिक मामलों पर अन्य प्रकाशनों से संबंधित पुस्तकें भी प्रदर्शित की गई हैं।

मंडप के एक कर्मचारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘लोग इस मंडप को बहुत पंसद कर रहे हैं। कई लोग पढ़ने के लिए किताब उठाते हैं और ‘सूडान ब्लॉक’ की प्रतिकृति के सामने बैठकर उस पल में खो जाते हैं। मंडप के बीच में बने मंच पर लेखक और सैन्य शोधकर्ता व्याख्यान देते हैं।’’

एक अलग दीवार पर लगा पैनल भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालता है।

भाषा शफीक पारुल

पारुल