हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बहकर तीन कांवड़िए लापता

हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बहकर तीन कांवड़िए लापता

हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बहकर तीन कांवड़िए लापता
Modified Date: August 9, 2026 / 06:11 pm IST
Published Date: August 9, 2026 6:11 pm IST

हरिद्वार, नौ अगस्त (भाषा) उत्तराखंड के हरिद्वार में दो अलग-अलग घटनाओं में गंगा जल लेने आए तीन कांवड़िए स्नान के दौरान नदी के तेज बहाव में बहकर लापता हो गए। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, पानी के तेज बहाव में बह रहे एक अन्य कांवड़िए को जल पुलिस के जवानों ने सुरक्षित बचा लिया।

पुलिस के अनुसार लापता कांवड़ियों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पुलिस ने बताया कि रविवार को हर की पौड़ी के पास धनुष पुल के नीचे एक कांवड़िया सुरक्षा रेलिंग पार कर गंगा में स्नान कर रहा था। इसी दौरान वह अचानक तेज धारा की चपेट में आ गया और देखते ही देखते गहरे पानी में लापता हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कांवड़िया रेलिंग के बाहर खड़े होकर गंगा में डुबकी लगा रहा था। जैसे ही उसने पानी में छलांग लगाई, तेज बहाव उसे अपने साथ बहा ले गया।

घटना की सूचना मिलते ही जल पुलिस और अन्य राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे और नावों तथा अन्य संसाधनों की मदद से गंगा में तलाश अभियान शुरू किया गया। हालांकि, अभी तक उसका पता नहीं चल सका है। पुलिस लापता कांवड़िए की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

इससे पहले, शनिवार देर शाम नमामि गंगे घाट पर हुई एक अन्य घटना में गंगा स्नान के दौरान तीन कांवड़िए तेज बहाव में बहने लगे। जल पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए इनमें से एक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि दो अन्य गहरे पानी में लापता हो गए।

पुलिस ने बताया कि लापता कांवड़ियों की पहचान उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी 20 वर्षीय पंकज सिंह और बुलंदशहर निवासी 22 वर्षीय आनंद कश्यप के रूप में हुई है। दोनों की तलाश के लिए खोज अभियान जारी है।

प्रशासन लगातार कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से तेज बहाव वाले क्षेत्रों तथा प्रतिबंधित स्थानों पर स्नान नहीं करने की अपील कर रहा है। इसके बावजूद कुछ श्रद्धालु सुरक्षा रेलिंग पार कर खतरनाक स्थानों पर पहुंच रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ रहा है।

नगर पुलिस क्षेत्राधिकारी शिशुपाल सिंह नेगी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें।

भाषा

सं, दीप्ति रवि कांत


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