समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से रक्त कैंसर को हराना संभव: चिकित्सा विशेषज्ञ

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समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से रक्त कैंसर को हराना संभव: चिकित्सा विशेषज्ञ

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 05:11 PM IST

जयपुर, 27 मई (भाषा) चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार बुखार आना, शरीर में कमजोरी होना, खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना भले ही लक्षण सामान्य नजर आते हों, लेकिन यदि उपचार के बाद भी अगर ये ठीक न हों तो ये रक्त कैंसर के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं।

भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के ब्लड कैंसर एवं अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने यहां 28 मई को विश्व रक्त कैंसर दिवस पर कहा कि समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से रक्त कैंसर को पूर्णतः हराकर एक सामान्य जीवन जिया या जा सकता है।

बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी माथुर ने बताया कि बच्च्चों में कई तरह के रक्त कैंसर होते हैं तथा उपचार करके उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है।

डॉ. शेखावत ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में ‘कार-टी सेल थेरेपी’ और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बीएमटी) जैसी अत्याधुनिक तकनीकें रक्त कैंसर और गंभीर रक्त रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभरी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को विशेष तकनीक से कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। वहीं बीएमटी के माध्यम से रोगग्रस्त अस्थि मज्जा को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। यह उपचार ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में उपयोगी है।’’

अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ शेखावत ने बताया कि अस्पताल में रक्त कैंसर से संबंधित दो परीयोजनाएं चलाई जा रही है, जिनके तहत रोगियों को निःशुल्क उपचार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए जीवनदान परियोजना है जिसके तहत अगस्त 2014 से मार्च 2026 तक 11.03 करोड़ रुपए की लागत से 176 बच्चों का उपचार कर उन्हें कैंसर मुक्त किया गया तथा ये बच्चे सामान्य जीवन जी रहे है।

उन्होंने कहा कि व्यस्कों में होने वाले रक्त कैंसर के लिए ‘क्रोनिक माईलोइड ल्यूकीमिया’ कैंसर मुक्ति योजना (सीएमएल-सीएमवाए) हैं तथा उसके तहत अगस्त 2015 से मार्च 2026 तक 2.47 करोड़ रुपए की लागत से 340 रोगियों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया गया।

डॉ. शिवानी ने बताया कि जागरुकता की कमी के चलते इस रोग की पहचान नहीं होती है और उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाती।

उन्होंने कहा कि हर रोगी में शुरुआती लक्षण अलग-अलग होते हैं, जिनमें बार-बार बुखार आना, एनिमिया का उपचार लेने के बाद भी ठीक न होना, शरीर पर गांठ का उभरना शामिल है।

डॉ. शिवानी ने कहा कि इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी असमान्य लक्षण उपचार के बाद भी लम्बे समय तक ठीक न हो तो कैंसर रोग विशेषज्ञ से एक बार परामर्श अवश्य करना चाहिए।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार