आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से कोलकाता में यातायात प्रभावित, पुलिस ने मार्च रोका

Ads

आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से कोलकाता में यातायात प्रभावित, पुलिस ने मार्च रोका

  •  
  • Publish Date - January 21, 2026 / 05:11 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 05:11 PM IST

कोलकाता, 21 जनवरी (भाषा) न्यूनतम मासिक मानदेय में वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर हजारों आशा कार्यकर्ताओं के पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय तक मार्च को बुधवार को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने कोलकाता के एस्प्लेनेड और साल्ट लेक में प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया।

पुलिस ने बताया कि विभिन्न जिलों से आयी प्रदर्शनकारियों को सुबह सियालदह और हावड़ा रेलवे स्टेशन से निकलते ही रोक दिया गया था।

उन्होंने बताया कि हालांकि, लगभग 1,000 मान्यता प्राप्त आशा कार्यकर्ताओं ने बाद में एस्प्लेनेड और साल्ट लेक में करुणमयी में फिर से इकट्ठा होकर मार्च को फिर से शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें फिर से रोक दिया।

पुलिस ने मौलाली, सियालदह के प्राची सिनेमा और बहूबाजार समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिससे तीखी बहसें हुईं।

एक अधिकारी ने बताया कि साल्ट लेक में, जहां स्वास्थ्य विभाग का मुख्यालय ‘स्वास्थ्य भवन’ स्थित है, वहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड फांदकर परिसर में घुसने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई।

उन्होंने बताया कि एस्प्लेनेड के डोरिना चौराहे पर भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की।

स्वास्थ्यकर्मियों ने दावा किया कि उन्हें महीनों से भुगतान नहीं किया गया है और विभिन्न चिकित्सा आपात स्थितियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों में तैनाती के बावजूद उन्हें बहुत कम राशि मिल रही है।

अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर धरने के कारण कोलकाता के कुछ हिस्सों और उत्तरपूर्व के उपनगर सॉल्ट लेक में दो घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा।

पुलिस ने पूर्व अनुमति ना होने के कारण इस जमावड़े को अवैध बताते हुए कहा कि एस्प्लेनेड और सॉल्ट लेक से कई आशा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, क्योंकि उन्होंने तितर-बितर होने से इनकार कर दिया था।

डीसी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी ने कहा कि प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ता एस्प्लेनेड स्थित एस एन बनर्जी रोड पर यातायात बाधित कर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘‘यात्रियों को असुविधा हो रही है।’’

इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस कार्रवाई को ‘‘बर्बर’’ बताया और दावा किया कि यह ‘‘अमानवीय ममता बनर्जी सरकार’’ के निर्देश पर किया जा रही है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने पत्रकारों से कहा, ‘‘उन्होंने पूरे राज्य में महिलाओं के खिलाफ आतंक और क्रूरता का राज फैला रखा है।’’

आशा कार्यकर्ताओं ने 23 दिसंबर से काम बंद कर रखा है और यह दावा करते हुए अलग-अलग जिलों से कोलकाता आई हैं कि स्वास्थ्य सचिव एन एस निगम ने 21 जनवरी को उनकी शिकायतें सुनने का आश्वासन दिया था।

हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया गया था और विरोध प्रदर्शन के बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं मिली थी।

प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने इससे पहले आठ जनवरी और 12 जनवरी को प्रदर्शन किया था। वे अपनी लंबे समय से लंबित मांग को लेकर वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं, जिसमें प्रदर्शन-आधारित भत्तों के बजाय निश्चित मासिक वेतन की मांग शामिल थी।

आशा कार्यकर्ताओं की मांगों में न्यूनतम 15,000 रुपये का मासिक मानदेय और ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये का बीमा कवर शामिल है।

दक्षिण दिनाजपुर की आशा कार्यकर्ता चंदना बारीक ने कहा, “हमें प्रतिदिन 15-16 घंटे काम करने के लिए लगभग 5,500 रुपये प्रति माह मिलते हैं। हम अपना गुजारा कैसे करेंगे?”

‘स्वास्थ्य भवन’ के बाहर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी बीमार भी पड़ गई, जिसकी मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने देखभाल की।

भाषा अमित नरेश

नरेश