नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नोएडा में पिछले महीने औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को मंगलवार को फिलहाल न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश देते हुए कहा कि कानून अपना काम करेगा।
मामले के दो आरोपियों -आदित्य आनंद और रूपेश रॉय- को शीर्ष अदालत के 15 मई के आदेश का पालन करते हुए न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ के समक्ष व्यक्तिगत तौर पर पेश किया गया। पीठ ने दोनों आरोपियों से बातचीत की।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले पर विचार लंबित रहने तक, हम दोनों व्यक्तियों- आदित्य आनंद और रूपेश रॉय- को न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश देते हैं।’’
न्यायालय ने यह भी कहा कि इस याचिका का लंबित होना कानून के अनुसार राहत मांगने के रास्ते में आड़े नहीं आएगा।
शीर्ष अदालत ने आरोपियों को जांच में पुलिस का सहयोग करने का निर्देश दिया।
पीठ आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों द्वारा उसके भाई की प्रताड़ना का आरोप लगाया गया था।
पीठ ने इस विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक अन्य मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा की एहतियातन हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किये।
आदित्य आनंद के भाई द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि इस मामले में गिरफ्तारी के बाद आदित्य को हिरासत में पुलिस बर्बरता का सामना करना पड़ा।
आदित्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि आरोपी को हिरासत में प्रताड़ित किया गया है, इसलिए उसे पुलिस हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान, आदित्य और रूपेश ने पीठ को पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ हुई कथित प्रताड़ना और बर्बरता के बारे में बताया।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि आरोपियों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने कहा कि हर किसी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए।
भाषा सुरेश माधव
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