UCC In Gujarat|| Image- ANI News File
UCC In Gujarat: नई दिल्ली: उत्तराखंड के बाद आज एक और भाजपा शासित राज्य गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित हो गया है। गुजरात में UCC लागू होने के पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ख़ुशी जाहिर की है। गृहमंत्री शाह ने UCC विधेयक पारित होने पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि, (UCC In Gujarat) देश सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है।
UCC In Gujarat: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, “देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “मुझे हर्ष है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित करने का ऐतिहासिक कार्य कर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और इस बिल को समर्थन देने वाले सभी विधायकों को बधाई देता हूं।” (UCC In Gujarat) गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में फिर से कहा, “देश तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है।”
देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। मुझे हर्ष है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित करने का ऐतिहासिक कार्य कर…
— Amit Shah (@AmitShah) March 25, 2026
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, गुजरात विधानसभा में मंगलवार को 7 घंटे से अधिक समय बहस के बाद UCC विधेयक को पास किया गया। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने सदन में यह बिल पेश किया था। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने यूसीसी को अपनाया है। (UCC In Gujarat) उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य था, जिसने फरवरी 2024 में यूसीसी बिल पास किया।
बUCC In Gujarat: ताया जा रहा है कि, ‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026’ कानून पूरे राज्य में लागू होगा। (UCC In Gujarat) हालांकि, विधेयक में यह साफ किया गया है कि यह कोड अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं।
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