विश्वविद्यालयों को बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप प्रगतिशील पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए: बिरला

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विश्वविद्यालयों को बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप प्रगतिशील पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए: बिरला

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  • Publish Date - July 15, 2023 / 06:25 PM IST,
    Updated On - July 15, 2023 / 06:25 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ज्ञान और शिक्षा को सामाजिक एवं आर्थिक विकास का साधन बताते हुए शनिवार को कहा कि शिक्षाविदों, प्रशासकों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को शैक्षिक क्षेत्र में बदलावों को अपनाते हुए बदलते समय की उभरती जरूरतों के अनुसार एक प्रगतिशील पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए।

ओम बिरला ने आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) , नई दिल्ली में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद छात्रों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि आजादी के बाद प्रारंभिक दिनों में संविधान निर्माताओं के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी थीं क्योंकि भारत न केवल आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा था, बल्कि साक्षरता का स्तर भी बहुत कम था।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बाबा साहब ने शिक्षा और सामाजिक न्याय नवोदित लोकतंत्र की प्रगति के लिए सर्वोपरि बताया था और लोगों के जीवन में उनके महत्व पर जोर दिया था।

बिरला ने कहा कि समानता और न्याय के आदर्श बाबासाहेब के दिल के सबसे करीब थे और यह भारतीय लोकतंत्र को लगातार मजबूत करते हैं।

शिक्षा के प्रसार में इग्नू के योगदान का जिक्र करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 38 वर्षों में इग्नू ऐसे छात्रों के लिए आशा की किरण बनकर खड़ा हुआ है जो अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए नियमित कॉलेज जाने में असमर्थ हैं।

उन्होंने कहा कि इग्नू ने देश में उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बिरला ने कहा कि ज्ञान और शिक्षा सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साधन है और शिक्षाविदों, प्रशासकों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को शैक्षिक क्षेत्र में बदलावों को अपनाते हुए बदलते समय की उभरती जरूरतों के अनुसार एक प्रगतिशील पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए।

बयान के अनुसार, इस दौरान बिरला ने इग्नू रिसर्च यूनिट का नाम सावित्री बाई फुले रिसर्च यूनिट रखा।

भाषा दीपक दीपक पवनेश

पवनेश