उप्र: उफनती पांडु नदी की वजह से कानपुर के कई इलाकों में बाढ़

उप्र: उफनती पांडु नदी की वजह से कानपुर के कई इलाकों में बाढ़

उप्र: उफनती पांडु नदी की वजह से कानपुर के कई इलाकों में बाढ़
Modified Date: September 7, 2026 / 02:58 pm IST
Published Date: September 7, 2026 2:58 pm IST

कानपुर, सात सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर तथा कानपुर देहात के कई इलाकों में उफनती पांडु नदी की वजह से बाढ़ आ गई है, जिससे लगभग 40,000 लोग और 1,000 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का पानी आवासीय इलाकों में घुस गया है और सड़क संपर्क बाधित हो गया है। यह जानकारी सोमवार को एक अधिकारी ने दी।

कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कानपुर बैराज में नदी का ऊपरी जलस्तर 114.200 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी के निशान 114 मीटर को पार कर गया है और खतरे के निशान 115 मीटर के करीब पहुंच गया है।

बाढ़ का पानी कई आवासीय इलाकों में घुस गया है। कुछ सड़कों पर पांच-सात फुट और निचले इलाकों में घरों के अंदर छह फुट तक पानी दर्ज किया गया। कई परिवार बाहर चले गए हैं, जबकि कुछ निवासी छतों पर फंसे हुए हैं।

वरुण विहार में निचले इलाकों में घरों में पानी भर गया है और कुछ झोपड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई विस्थापित परिवारों को गुजैनी नहर के किनारे प्लास्टिक शीट से आश्रय बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

प्रशासन ने बर्रा-8 में मायापुरम, रविदासपुरम और वरुण विहार के निवासियों के लिए राहत शिविर स्थापित किया है। जिलाधिकारी और स्थानीय विधायक सुरेंद्र मैथानी ने प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री बांटी।

पिपौरी गांव में 200 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। बृहस्पतिवार रात नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बचाव अभियान शुरू किया और सैकड़ों निवासियों को निकाला।

तीन दिन पहले जिलाधिकारी ने पिपौरी का निरीक्षण किया था, जबकि उपजिलाधिकारी (सदर) अनुभव सिंह ने मोटर चालित नौका से करीब एक घंटे तक बाढ़ग्रस्त इलाकों का सर्वेक्षण किया था।

बिधनू प्रखंड के बिहारी पुरवा में एक स्कूल में लगभग छह फुट पानी भर गया है, जबकि कई गलियों में आठ से 10 फुट तक पानी भरा है। कुछ निवासी सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं, जबकि जो जाने में असमर्थ हैं उन्होंने प्लास्टिक की चादरों से ढकी छतों पर शरण ली है।

बाढ़ के कारण एक अस्थायी पुल डूबने से बिकरू-शिवली मार्ग भी कट गया है।

पांडु नदी पुल से दो-तीन फुट ऊपर बह रही है, जिससे बिकरू, तकीपुर देवकली, कंजती, कांशीराम पुरवा, बच्चीपुर और सखरेज के निवासियों को शिवली बाजार तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

शिवली क्षेत्र के मझिहार, मोगरा, रामगढ़, सिंहपुर शिवली, बकसपुरवा, हरदिया नाला, कैलई और मवैया सहित कई गांवों में भी जलभराव की सूचना है।

बढ़ते पानी का असर खेती पर भी पड़ा है। सोनू सिंह, गोवर्धन सिंह और जयचंद सिंह सहित भग्गा निवाड़ा के निवासियों ने कहा कि लगभग 250 बीघे धान और बाजरा की फसल जलमग्न हो गई है।

रसूलाबाद के खेड़ा कुर्सी गांव के निचले इलाकों और खेतों में भी पानी घुस गया है ।

ग्रामीण भोला अवस्थी और दीपेंद्र मिश्रा ने कहा कि गंगादीन निवादा में, राम धाम मंदिर पानी से घिरा हुआ है, जिससे भक्तों को गंदे पानी से होकर पूजा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

तोरणा बाजार के पास कुर्सी खेड़ा का गणेश मंदिर भी इसी तरह बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है।

वहीं, एक अन्य ग्रामीण मोंटी दीक्षित ने कहा कि अगर पानी नहीं घटा तो निवासियों को गणेश महोत्सव और अन्य आगामी धार्मिक आयोजनों के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

रसूलाबाद में उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार, तहसीलदार पंकज उपाध्याय ने राजस्व अधिकारियों के साथ शनिवार को नदी के किनारे बसे गांवों का दौरा किया और स्थिति का आकलन किया।

उपजिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीणों को पलिया-बांस खेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में एक राहत केंद्र के बारे में बताया गया, जहां स्थिति बिगड़ने पर लोगों को स्थानांतरित किया जा सकता है।

इस बीच, प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता उपाय तेज कर दिए हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने और स्वास्थ्य शिविर स्थापित करने का निर्देश दिया है।

भाषा सं जफर

मनीषा नेत्रपाल

नेत्रपाल


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