(मनीष राज)
नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत न्याय विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, देश भर की त्वरित (फास्ट ट्रैक) अदालतों में लंबित मामलों में से लगभग 78 प्रतिशत मामले उत्तर प्रदेश के हैं, जहां 13.74 लाख से ज्यादा मामले निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं।
आरटीआई के तहत मिले 30 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर की त्वरित अदालतों में 17.5 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं।
जवाब के अनुसार, त्वरित अदालतें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संबंधित उच्च न्यायालयों के साथ सलाह-मशविरा करके खास तरह के मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए बनाई जाती हैं।
यह डेटा न्याय विभाग ने इस साल 10 अगस्त को नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा आरटीआई कानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में साझा किया था।
इसमें कहा गया, ‘‘उच्च न्यायालयों से मिली जानकारी के अनुसार, 30 जून, 2026 तक 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 884 त्वरित अदालतें काम कर रही हैं। इन त्वरित अदालतों को स्थापित करने के लिए राज्यों को कोई केंद्रीय सहायता नहीं दी जा रही है।’’
राज्य-वार आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश लंबित मामलों की सूची में सबसे ऊपर है, जहां 373 कार्यरत त्वरित अदालतों में 13.74 लाख से ज़्यादा मामले लंबित हैं।
इसके बाद महाराष्ट्र का नंबर आता है, जहां कार्यरत 117 त्वरित अदालतों में 1,35,340 मामले लंबित हैं। अधिक लंबित मामलों वाले अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल (93,245 मामले), तमिलनाडु (89,703 मामले) और असम (17,145 मामले) शामिल हैं।
दिल्ली में 26 त्वरित अदालतें काम कर रही हैं जिनमें 7,385 मामले लंबित हैं।
इन अदालतों में सिक्किम में सबसे कम लंबित मामले पाए गए जहां दो त्वरित अदालतों में 18 मामले लंबित मिले। पंजाब में 7 त्वरित अदालतों में 161 मामले लंबित हैं।
कई भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी त्वरित अदालत नहीं है। उत्तर के अनुसार 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 15 में एक भी त्वरित अदालत काम नहीं कर रही है।
इन राज्यों में बिहार, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का संयुक्त क्षेत्र, लद्दाख और लक्षद्वीप हैं जहां एक भी चालू त्वरित अदालत नहीं है।
भाषा वैभव अविनाश
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