संघर्ष के चारों दिन हमने अपना दबदबा बनाए रखा: ऑपरेशन सिंदूर पर सीडीएस जनरल चौहान

Ads

संघर्ष के चारों दिन हमने अपना दबदबा बनाए रखा: ऑपरेशन सिंदूर पर सीडीएस जनरल चौहान

  •  
  • Publish Date - May 14, 2026 / 07:16 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 07:16 PM IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पास स्थिति की अच्छी जानकारी और युद्धक्षेत्र में बेहतर पारदर्शिता थी, तथा उन्होंने संघर्ष के ‘‘चारों दिन दबदबा बनाए रखा’’।

यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘कलम और कवच’ रक्षा सम्मेलन में एक संवाद सत्र के दौरान उनकी यह टिप्पणी, देश और सशस्त्र बलों द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ मनाए जाने के कुछ दिन बाद आई।

उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘चारों दिन हमने स्थिति की व्यापक जानकारी के कारण तनाव के स्तर पर हर तरह से अपना दबदबा बनाए रखा। हमें पता था कि हमने किसको निशाना बनाया है, क्या हो रहा है।’’

सीडीएस ने कहा कि भारतीय सेना को न केवल अपनी तरफ बल्कि सीमा पार भी स्थिति की बेहतर जानकारी थी, और ‘‘हम तनाव के हर स्तर पर दबदबा बनाए रखने में सक्षम थे’’।

यह पूछे जाने पर कि ड्रोन और उन्नत हथियारों के प्रभुत्व वाले युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए वह भविष्य के युद्धक्षेत्र की कल्पना कैसे करते हैं, उन्होंने लंबे समय तक जारी रहने वाले संघर्षों में उलझने को लेकर आगाह किया।

सीडीएस ने कहा, ‘‘हमें दीर्घकालिक युद्ध के जाल में नहीं फंसना चाहिए। आजकल राष्ट्रों में बल प्रयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। लेकिन, बल प्रयोग के बाद उस स्थिति से बाहर निकलना… एक बड़ी चुनौती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपके उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट होने चाहिए, आपके राजनीतिक-सैन्य उद्देश्य। एक बार जब आप उन्हें प्राप्त कर लेते हैं, तो फिर अटके रहने का कोई मतलब नहीं है। आपके पास स्पष्ट रूप से निर्धारित एक निकास रणनीति होनी चाहिए।’’

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पिछले साल छह-सात मई की मध्यरात्रि ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों को भीषण हमलों में नष्ट कर दिया था।

बाद में, पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू किए, और भारत द्वारा किए गए सभी जवाबी हमले भी ऑपरेशन सिंदूर के तहत ही किए गए।

परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला सैन्य संघर्ष 10 मई की शाम उनके बीच एक सहमति पर पहुंचने के बाद समाप्त हो गया।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश