बंगाल को विभाजित किये बिना गोरखा समस्या का संवैधानिक रूप से समाधान करेंगे : शाह

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बंगाल को विभाजित किये बिना गोरखा समस्या का संवैधानिक रूप से समाधान करेंगे : शाह

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 06:40 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 06:40 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

गंगारामपुर/मानिकचक (पश्चिम बंगाल), 14 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल की सत्ता में आती है तो दार्जिलिंग पहाड़ियों में निवास करने वाले गोरखा समुदाय के मुद्दे का वह राज्य का विभाजन किए बिना संवैधानिक तरीके से समाधान करेगी।

दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में उत्तर बंगाल के लिए घोषित विकास परियोजनाओं का उल्लेख किया।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ‘‘मैं दार्जिलिंग के अपने गोरखा भाइयों से कहना चाहता हूं कि सत्ता में आने पर भाजपा न केवल पहाड़ियों में एक पर्यावरण-अनुकूल रोमांचक खेल केंद्र विकसित करेगी, बल्कि राज्य को विभाजित किए बिना संवैधानिक तरीके से गोरखा मुद्दे का समाधान भी करेगी।’’

दार्जिलिंग की पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी लोग करीब एक सदी से गोरखालैंड नाम से अलग प्रदेश की मांग की रहे हैं और कई बार उनका आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है।

दार्जिलिंग के ऊपरी इलाकों और तराई के कुछ हिस्सों के प्रशासन के लिए 2011 में अर्ध-स्वायत्त गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के गठन के बावजूद, 2017 तक हिंसक आंदोलन होते रहे।

इस क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा (जीएनएलएफ) जैसी स्थानीय गोरखा पार्टियों और भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े दलों के बीच राजनीतिक साझेदारी को लेकर कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस इलाके में अलग गोरखालैंड की मांग हमेशा से राजनीति के केंद्र में रहा है।

इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाप में तृणमूल कांग्रेस ने बिमल गुरुंग नीत जीजेएम से अलग हुए गुट, अनित थापा के नेतृत्व वाले भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजेएम) के साथ गठबंधन किया है और दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कुर्सियोंग की सीटें अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ दी हैं।

दूसरी ओर, भाजपा एक बार फिर अपने पूर्व सहयोगी गुरुंग के साथ है। हालांकि इस बार वह इस क्षेत्र से सीधे चुनाव लड़ रही है।

पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के मुद्दे को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा राज्य में राजनीतिक हिंसा, ‘सिंडिकेट’ और रिश्वतखोरी के राज को समाप्त करेगी और घुसपैठियों को प्राथमिकता के आधार पर निष्कासित करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ उत्तर बंगाल में कमल के चिह्न के बगल में स्थित ईवीएम बटन को इतनी जोर से दबाएं जिससे पूरे भारत में घुसपैठिए बिजली का झटका महसूस कर सकें।’’

शाह पिछले कुछ हफ्तों से पश्चिम बंगाल का नियमित दौरा कर रहे हैं और 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों से पहले राज्य में कई जनसभाएं कर चुके हैं। उत्तरी बंगाल के जिलों में 23 अप्रैल को मतदान होगा। भाजपा यहां घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही हैं।

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में- 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और मतों की गिनती चार मई को होगी।

शाह ने आरोप लगाया कि आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के ‘एजेंट’ हैं। उन्होंने दावा किया कि कबीर मुख्यमंत्री की सहमति से बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद का निर्माण कर रहे थे।

केंद्रीय गृहमंत्री ने मालदा जिले के मानिकचक में एक अन्य जनसभा में कहा, ‘‘ हुमायूं कबीर मेरी बात कान खोलकर सुन लें कि भाजपा मस्जिद का निर्माण नहीं होने देगी। ममता बनर्जी और उनके भतीजे को भी यह पता होना चाहिए कि पांच मई को, मतगणना के एक दिन बाद, उस मस्जिद को बनाने का उनका सपना चकनाचूर हो जाएगा।’’

मुर्शिदाबाद के भरतपुर से निवर्तमान विधायक कबीर को पिछले साल दिसंबर में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बेलडांगा में मस्जिद निर्माण की घोषणा के बाद तृणमूल ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। कबीर ने खुद अपनी पार्टी बनाई है और चुनाव लड़ रहे हैं।

शाह ने वादा किया कि पश्चिम बंगाल से अन्य राज्यों को आलू की आपूर्ति करने की अनुमति दी जाएगी ताकि यहां के किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके।

शाह ने पार्टी के घोषणापत्र में किए गए वादों को भी दोहराया कि उत्तरी बंगाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), 600 बिस्तर के कैंसर अस्पताल, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईएमएम) और खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राजबंशी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश