नेल्लोर (आंध्र प्रदेश), 30 नवंबर (भाषा) युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी(वाईएसआरसीपी) के वरिष्ठ नेता काकानी गोवर्धन रेड्डी ने रविवार को मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर राज्य में जारी जिलों के पुनर्गठन के जरिए किसानों और क्षेत्रों के बीच ‘जानबूझकर दरार’ पैदा करने का आरोप लगाया।
गोवर्धन रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू नेल्लोर जिले के गुडूर को लेकर किए गए अपने चुनावी वादे से पीछे हट गए हैं और “जिले की सीमाओं को अव्यवस्थित तरीके से बदल रहे हैं” जिससे मौजूदा प्रशासनिक ढांचे पर निर्भर किसानों में बेचैनी और असंतोष फैल गया है।
गोवर्धन रेड्डी ने यहां प्रेस वार्ता में कहा, “वाईएसआरसीपी ने नायडू को चेतावनी दी कि वे जिलों के पुनर्गठन के नाम पर किसानों और क्षेत्रों के बीच दरार पैदा न करें।”
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी(टीडीपी) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार स्थानीय कृषि जरूरतों पर विचार किए बिना जिलों का पुनर्गठन कर रही है और इससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच गंभीर तनाव पैदा हो रहा है।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को प्रशासनिक इकाइयों के रूप में मानकर जिलों का पुनर्गठन किया था और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अल्लूरी सीताराम राजू जिला बनाया था, जबकि वर्तमान सरकार का तरीका इससे बिल्कुल अलग है।
गोवर्धन रेड्डी ने सवाल उठाया कि नायडू अपनी इस ‘प्रतिबद्धता से क्यों पीछे हट गए’ कि गुडूर को नेल्लोर जिले के भीतर ही रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि शुरू में नेल्लोर का हिस्सा रहे वेंकटगिरी, रापुर, कलुवायी और सैदापुरम मंडल अब जनता के प्रतिरोध के बावजूद तिरुपति में स्थानांतरित किए जा रहे हैं।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि इन मंडलों को नेल्लोर जिले से अलग रखने से किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से जल-बंटवारे, सिंचाई समन्वय और समग्र प्रशासनिक पहुंच में बाधा उत्पन्न होगी और इस तरह के व्यवधानों के दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं।
वाईएसआरसीपी नेता ने टीडीपी नेता सोमीरेड्डी चंद्रमोहन रेड्डी पर ‘अपने सर्वपल्ली निर्वाचन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाने’ का आरोप लगाया है। नेता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री को केवल एक पत्र लिखना ‘स्थानीय समस्याओं के प्रति सत्तारूढ़ पार्टी की गंभीरता की कमी को दर्शाता है’।
इस बीच, सत्तारूढ़ टीडीपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
भाषा प्रचेता नरेश
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