Reported By: Saurabh Singh Parihar
,Vijay Sharma in West Bengal Election: पश्चिम बंगाल चुनाव में डिप्टी सीएम विजय शर्मा को मिली बड़ी जिम्मेदारी / Image: IBC24 Customized
रायपुर: Vijay Sharma in West Bengal Election पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का आगाज चुका है और सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी मैदान में उतरकर जनता को अपने पक्ष में रिझाने की पूरी पूरजोर ताकत लगा रही है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष में बैठी टीएमसी फिर से सरकार बनाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है तो दूसरी ओर भाजपा भी यहां पर सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। इसी बीच खबर आ रही है कि छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा को भाजपा ने बंगाल चुनाव के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
Vijay Sharma in West Bengal Election मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा को प. बंगाल चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि यहां पर गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों के लिए एक टीम का गठन किया गया है, जिसका प्रमुख डिप्टी सीएम विजय शर्मा को बनाया गया है। बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद डिप्टी CM विजय शर्मा ने कहा है कि लगातार केंद्रीय नेताओं का पश्चिम बंगाल प्रवास हो रहा है। सभी नेताओं के प्रवास के लिए टीम बनाई गई है, जिसमें HM अमित शाह के दौरे को लेकर मुझे भी ज़िम्मेदारी मिली है।
वहीं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की 150 सीटों पर छत्तीसगढ़ के BJP नेताओं को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। इसे लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संगठन में बड़ी ताक़त है। छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ता प्रशिक्षित और समर्पित हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ की टीम को कई राज्यों में भेजा गया। बंगाल में भाजपा के पक्ष में बहुत अच्छा परिणाम आएगा।
बता दें कि पश्चिम बंगाल के चुनावी समंदर में इस बार ‘मछली’ सिर्फ थाली तक सीमित नहीं रही, बल्कि सियासत के केंद्र में आकर तैरने लगी है। तृणमूल कांग्रेस जहां ‘बांग्ला अस्मिता’ का जाल बुनकर इसे साधने में जुटी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी कोशिश कर रही है कि उसका रुख बंगाल के लोगों की ‘माछ-भात बंगाली’ के रूप में पहचान के खिलाफ न दिखे। पश्चिम बंगाल के चुनावी समंदर में इस बार ‘मछली’ सिर्फ थाली तक सीमित नहीं रही, बल्कि सियासत के केंद्र में आकर तैरने लगी है। तृणमूल कांग्रेस जहां ‘बांग्ला अस्मिता’ का जाल बुनकर इसे साधने में जुटी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी कोशिश कर रही है कि उसका रुख बंगाल के लोगों की ‘माछ-भात बंगाली’ के रूप में पहचान के खिलाफ न दिखे।
दरअसल, भोजन की पसंद अब पहचान और संस्कृति की लड़ाई में बदल गई है, जहां यह तय करने की होड़ मची है कि ‘असल बंगाली’ का प्रतिनिधित्व आखिर कौन करता है। ‘माछ-भात बंगाली’ इस चुनाव में लगभग सभी दलों का अनौपचारिक नारा बनकर उभरा है। तृणमूल ने इस भावना को सियासी धार देने की कोशिश करते हुए तर्क दिया है कि भारतीय जनता पार्टी हिंदी भाषी व उत्तर भारत की शाकाहार-समर्थक राजनीति से जुड़ी है और पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ उसका कोई मेल नहीं।
पार्टी का कहना है कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह भविष्य में मछली, मांस और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों पर पाबंदियां भी लगा सकती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक रैली में हमला और तेज करते हुए कहा, “वे (भाजपा) आपको मछली नहीं खाने देंगे। आप मांस नहीं खा सकते, अंडा नहीं खा सकते, बांग्ला में बात नहीं कर सकते। अगर करेंगे, तो आपको बांग्लादेशी कहा जाएगा।” राजनीतिक विश्लेषक मैदुल इस्लाम का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल को मुख्य रूप से “बंगालियों की पहचान और हितों” के नजरिये से देखती है उन्होंने, “बंगालियों की पहचान में भोजन में मछली का प्रयोग अहम है। जब कहीं मछली बाजारों पर हमले होते हैं या हिंदी भाषी नेता मछली को लेकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं, तो यह चुनावी मुद्दा बन जाता है। तृणमूल यह संदेश दे रही है कि वही बांग्लाभाषियों की पार्टी है और इसलिए उनकी खानपान की परंपराओं से उसका सीधा जुड़ाव है।”
विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में हर साल करीब 8.36 लाख टन मछली की खपत होती है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर डर का माहौल बना रही है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में मछली या मांस पर किसी तरह के प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं है और सत्तारूढ़ दल चुनाव को ‘मेन्यू कार्ड’ तक सीमित कर तुच्छ बना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अब भाजपा को खुले तौर पर यह साबित करना पड़ रहा है कि वह ‘मछली-विरोधी’ नहीं है।