बैठकें जारी हैं.. कितनी तैयारी है? क्या इस बार चलेगा मोदी का मैजिक या फिर बैठकों से मिलेगी चुनाव में जीत?

BJP is celebrating 9 years of PM Modi's tenure

  •  
  • Publish Date - May 27, 2023 / 11:16 PM IST,
    Updated On - May 27, 2023 / 11:16 PM IST

नवीन कुमार सिंह/भोपालः BJP is celebrating 9 years मध्यप्रदेश में बीजेपी पीएम मोदी के 9 साल के कार्यकाल पर जश्न मना रही है।इसके साथ ही ये कोशिश भी हो रही है कि चुनाव के पहले सुस्त पड़े कार्यकर्ताओं को मैदान में एक्टिव कर दिया जाए। पार्टी के भीतर उपजे असंतोष को भी कम करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं। वहीं कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन अब पार्टी के भीतर मचे कोहराम पर काबू पाना मुश्किल है।

Read More : फिर सामने आया ट्रिपल तलाक का मामला, गुजरात से फोन लगाकर पत्नी को दिया तलाक, पीड़ित महिला ने लगाई मदद की गुहार

BJP is celebrating 9 years दरअसल, मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अब पांच महीने से भी कम समय बचा है। इधर, केंद्र में बीजेपी सरकार के नौ साल पूरे हो गए हैं। लिहाजा बीजेपी पीएम मोदी के 9 साल की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नेताओं की नाराजगी कम करने के फॉर्मुले पर भी काम कर रही है। इसके लिए बीजेपी में मैराथन बैठकों का सिलसिला चल रहा है। तय कार्यक्रमों के अनुसार 30 मई से 30 जून तक बूथ स्तर पर महाजनसंपर्क कार्यक्रम चलेगा। इसके तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। योजनाओं के लाभार्थियों के साथ सेल्फी लेंगे और मिस कॉल करवाकर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देंगे। साथ ही 21 जून को योग दिवस पर केंद्र सरकार की 9 साल की उपलब्ध्यियों पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी। 23 जून को प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और फिर 25 जून को विधानसभा क्षेत्रों में प्रबुद्ध सम्मेलन होगें।

Read More : Kal Ka Rashifal : कल ये तीन राशि वाले धन लक्ष्मी योग से हो जाएंगे मालामाल, सूर्य देव की कृपा से मिलेगी खुशखबरी… 

इधर, कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी लाख कोशिश कर ले लेकिन इस बार सत्ता कांग्रेस को ही मिलेगी। कांग्रेस नेता तो ये भी कह रहे हैं कि राज्य सरकार के करप्शन और बीजेपी में मचे कलह का सीधा फायदा कांग्रेस को होगा। मध्यप्रदेश में बीजेपी एक बार फिर पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग रही है। कोशिश तो ये भी हो रही है कि नेतृत्व, संगठन और मंत्रियों के रवैये से खफा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नाराजगी भी इस अभियान के जरिए दूर कर ली जाए। लेकिन बाजी किसकी होगी, इस सवाल का जवाब सिर्फ जनता जानती है।