जुबान की तलवार, फिर हदें पार ! मर्यादा तार-तार.. आखिर कितनी बार, आखिर क्यों बिगड़ रहे हैं माननीयों के बोल?
जुबान की तलवार, फिर हदें पार ! मर्यादा तार-तार.. आखिर कितनी बारः Controversial statement of MLA Arjun Singh Kakodia from Barghat seat
Controversial statement of MLA Arjun Singh Kakodia
जनप्रतिनिधि उस सदन का हिस्सा होते हैं जहां तानाशाह, जुमलाजीवी, जयचंद, अंट-शंट, करप्ट, नौटंकी, ढिढोरा पीटना और निकम्मा जैसे शब्द भी अमर्यादित माने जाते है और उन्हें रिकॉर्ड में नहीं रखा जाता है। वही नेता जब जनता के बीच होते हैं तो मर्यादा भूल क्यों जाते हैं? यहां तक की संवैधानिक पद का सम्मान करना भी भूल जाते हैं?
सिवनी जिले की बरघाट सीट से विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया पहली बार के विधायक हैं। सोमवार को बाघ से ग्रामीण की मौत के बाद जब मतदाताओं के बीच पहुंचे तो ताव-ताव में शब्दों की मर्यादा ही भूल गए। वो शायद सीएम को चुनौती देना चाहते थे लेकिन इसके लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया उस पर बीजेपी ने जमकर पलटवार किया।
पहले राजा पटेरिया की प्रधानमंत्री पर टिप्पणी फिर संजय यादव का दे दनादन वाला बयान और अब काकोडिया की सीएम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद बीजेपी आक्रमक है। लेकिन ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने अपने नेताओं को अकेला छोड़ दिया है.. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जरुर राजा पटेरिया को गलत बताने वाला ट्वीट किया था लेकिन कांग्रेस के दूसरे नेता अपने साथियों की बात को जायज ठहरा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह भी काकोडिया का समर्थन कर रहे हैं।
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विधानसभा चुनाव में भले ही एक साल बचा हो लेकिन मध्यप्रदेश में सियासी बयानबाजी में गर्माहट आ चुकी है। दरअसल अब वक्त है कि नेताओं को अपने मतदाताओं के बीच जाना पड़ रहा है। ऐसे में कई बार अपने काम गिनाने के बजाय माननीय इस तरह के विवादित बोल देकर फंस जाते हैं।

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