Dhirendra Shastri On NEET Paper Leak: “पेपर लीक होता है, चुनाव नहीं” – NEET पेपर लीक पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान, सरकार के सामने रख दी ये बड़ी मांग

Dhirendra Shastri On NEET Paper Leak: बागेश्वर ने NEET पेपर लीक मामले पर कहा कि इसकी सजा छात्रों को नहीं बल्कि सिस्टम को मिलनी चाहिए।

Dhirendra Shastri On NEET Paper Leak: “पेपर लीक होता है, चुनाव नहीं” – NEET पेपर लीक पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान, सरकार के सामने रख दी ये बड़ी मांग

Dhirendra Shastri On NEET Paper Leak/Image: AI Generated

Modified Date: May 29, 2026 / 11:41 pm IST
Published Date: May 29, 2026 11:40 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बागेश्वर सरकार ने NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के समर्थन में बयान दिया
  • कहा- गलती विद्यार्थियों की नहीं, सिस्टम की है और दंड भी सिस्टम को मिलना चाहिए
  • प्रभावित छात्रों की अगली फीस माफ करने की मांग उठाई

Dhirendra Krishna Shastri On NEET Paper Leak: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण कथा का रसपान करा रहे है। इस दौरान दौरान बागेश्वर सरकार ने पिछले दिनों नीट पेपर लीक होने वाले विद्यार्थियों की पीड़ा को लेकर बड़ा बयान दिया हैं बागेश्वर सरकार में एक चौपाई के साथ कहा कि “हारियो न हिम्मत, बिसारियो न नाम। भगवान और सफलता खोजने से नहीं, खो जाने से मिलती है। खो जाने का मतलब डूब जाना होता है।”

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri On NEET Paper Leak) ने नीट पेपर लीक मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ बच्चे-बच्चियां उनसे मिलने आए थे, जिनका मन बहुत दुखी था। जब उनसे कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पेपर लीक हो गया। इस पर बागेश्वर सरकार ने कहा- पेपर लीक हो जाते हैं, पर कभी चुनाव लीक नहीं होते है और आगे कहा कि काश नेताओं के वोट लीक हो जाएं।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri On NEET Paper Leak) ने भारत सरकार से निवेदन करते हुए कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना लेकर बड़ी कठिनाई से फीस भरते हैं। कई माता-पिता खेती, मजदूरी और कर्ज लेकर बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। लेकिन जब पेपर लीक होता है तो केवल वह विद्यार्थियों का ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और मानसिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है,उन्होंने कहा “इसमें गलती विद्यार्थियों की नहीं, सिस्टम की गलती है और सिस्टम को यह दंड मिलना चाहिए कि अगली बार की फीस माफ होनी चाहिए। सिस्टम की गलती है तो भुगते भी सिस्टम ही। जब सिस्टम भुगतेगा तब उसे पता भी लगेगा कि गलती हुई है।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.