इंदौर (मध्यप्रदेश), आठ अगस्त (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्याय तक जनता की प्रभावी पहुंच के लिए संवाद, गरिमा और समावेशन जरूरी हैं और कानूनी सहायता का उद्देश्य केवल मुकदमों का निपटारा करना नहीं, बल्कि लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना भी है।
प्रधान न्यायाधीश ने इंदौर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के पश्चिमी जोन के क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि न्याय तक लोगों की पहुंच संवाद से शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि लोगों की अलग-अलग समस्याओं के मुताबिक उन्हें उचित कानूनी समाधान मुहैया कराए जाने चाहिए।
सीजेआई ने कहा, ‘‘अलग-अलग समुदायों का दुःख-दर्द उन्हीं की जुबान में सुना जाना चाहिए।’’
उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरणों से जुड़े स्वयंसेवकों को ‘‘न्यायिक सेना’’ का हिस्सा बताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इन स्वयंसेवकों को चाहिए कि वे गरिमापूर्ण और समावेशी तरीके से पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करें।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के कई न्यायधीश मौजूद थे।
भाषा हर्ष खारी
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