इंदौर (मध्यप्रदेश), 28 जनवरी (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 62 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिजनों ने बुधवार को कहा कि उसे दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण जान गंवानी पड़ी है।
ताजा मामले को मिलाकर स्थानीय लोगों ने महीना भर पहले फैले इस प्रकोप में अब तक कुल 29 लोगों की मौत का दावा किया है।
हालांकि, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 27 जनवरी (मंगलवार) को राज्य सरकार की पेश ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है।
परिजनों के मुताबिक भागीरथपुरा में रहने वाले खूबचंद बंधैया (62) ने उल्टी-दस्त के इलाज के दौरान अपने घर में मंगलवार को आखिरी सांस ली। उनका बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया।
बंधैया के बेटे रोहित ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘दूषित पानी पीने के कारण मेरे पिता को पिछले 15-20 दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। हम उन्हें भागीरथपुरा के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहां उन्हें दवाइयां दी गई थीं। हमारे घर में चल रहे इलाज के दौरान उनकी मंगलवार को मृत्यु हो गई।’’
रोहित ने दावा किया कि उन्होंने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों से कहा था कि उनके पिता को अस्पताल में भर्ती कराया जाए, लेकिन उनके घर एम्बुलेंस नहीं भेजी गई।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक सदस्यीय आयोग गठित किया है। उच्च न्यायालय ने इस आयोग को न्यायिक
जांच की कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया के बारे में पता चला। अधिकारियों ने कहा कि इस बैक्टीरिया के कारण भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए।
उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण इसमें एक शौचालय के सीवर का पानी मिल गया था।
भाषा हर्ष
संतोष
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