इंदौर, 15 जून (भाषा) मध्यप्रदेश के इंदौर में चिकित्सकों ने जटिल शल्य प्रक्रिया के जरिये 28 वर्षीय पुरुष की बड़ी आंत के हिस्से से पेशाब की नली बनाकर उसे नया जीवन दिया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में इस व्यक्ति का मूत्र मार्ग पूरी तरह नष्ट हो जाने के बाद वह करीब ढाई साल से पेट में डाली गई नली के जरिये पेशाब कर रहा था।
शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के मूत्र रोग विशेषज्ञ और सह-प्राध्यापक डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने और उनके साथी चिकित्सकों ने ‘एंटरो-यूरेथ्रोप्लास्टी’ के जरिये मरीज का मूत्र मार्ग पुनर्निर्मित किया।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार राज्य के किसी सरकारी चिकित्सा संस्थान में इस तरह की शल्य प्रक्रिया पहली बार की गई है।
उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले सड़क दुर्घटना में युवक के पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी टूट गई थी और मूत्र मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि युवक ने विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराया और कई चिकित्सकीय प्रक्रियाएं भी कराईं, लेकिन वह प्राकृतिक मूत्र मार्ग से पेशाब नहीं कर पा रहा था। इसके कारण उसके पेट में एक नली (सुप्राप्यूबिक कैथेटर) डाली गई थी जिसके जरिये वह मूत्र त्याग कर रहा था।
उन्होंने बताया, ‘‘एमवायएच में जांच के दौरान पाया गया कि युवक के मूत्र मार्ग का करीब 15 सेंटीमीटर हिस्सा नष्ट हो चुका था। सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में मुंह के अंदर गालों और होठों की भीतरी परत (बकल म्यूकोसा) का उपयोग करके ‘बकल म्यूकोसल ग्राफ्ट यूरेथ्रोप्लास्टी’ की जाती है, लेकिन इस मरीज में मूत्र मार्ग का क्षतिग्रस्त हिस्सा इतना लंबा था कि यह तकनीक कारगर नहीं थी।’’
मूत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि इस स्थिति के मद्देनजर मरीज की ‘एंटरो-यूरेथ्रोप्लास्टी’ की गई जिसे मूत्र मार्ग के पुनर्निर्माण की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में गिना जाता है।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक में बड़ी आंत के एक हिस्से को उसकी रक्त वाहिकाओं के साथ निकालकर स्थानांतरित किया जाता है और उससे नया मूत्र मार्ग तैयार किया जाता है।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया,‘‘इस शल्य प्रक्रिया के बाद युवक अब प्राकृतिक मूत्र मार्ग से पेशाब कर रहा है और उसकी स्थिति ठीक है।’’
भाषा
हर्ष रवि कांत