भोपाल, 20 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के भोपाल की एक अदालत ने ‘चेक बाउंस’ के एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई दो वर्ष के कारावास की सजा और 38.50 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को निरस्त कर दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश विधान महेश्वरी ने धनेश चतुर्वेदी की अपील स्वीकार कर ली।
धनेश ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) अदालत के नौ जून, 2025 के फैसले के खिलाफ यह अपील दायर की थी।
मजिस्ट्रेट अदालत ने चतुर्वेदी को दोषी ठहराते हुए उन्हें दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी और साथ ही, 38.50 लाख रुपये मुआवजा और 75 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने का निर्देश दिया था।
‘केजीएन कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक सैयद आजम अली द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धनेश चतुर्वेदी ने ‘इम्पीरियल सिटी’ आवासीय परियोजना में भूखंडों से जुड़े लेनदेन के संबंध में 18.45 लाख रुपये के 13 चेक जारी किए थे।
धनेश की ओर से पेश अधिवक्ता राजेश नेमा ने दलील दी कि शिकायतकर्ता विवादित चेकों के आधार पर अपीलकर्ता की किसी वैधानिक देनदारी को साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने पिछले सप्ताह अपील स्वीकार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि संबंधित चेक किसी वैधानिक रूप से वसूल किए जा सकने वाले ऋण या अन्य देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किए गए थे।
अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता की वैधानिक देनदारी साबित नहीं हो सकी इसलिए उसे आरोपों से बरी किया जाता है।
भाषा सं दिमो जितेंद्र
जितेंद्र