मप्र : मॉनसून सत्र के पहले दिन विस में यूसीसी विधेयक पेश, मुख्यमंत्री से जुड़े भूमि सौदों पर हंगामा

Ads

मप्र : मॉनसून सत्र के पहले दिन विस में यूसीसी विधेयक पेश, मुख्यमंत्री से जुड़े भूमि सौदों पर हंगामा

  •  
  • Publish Date - July 20, 2026 / 10:19 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 10:19 PM IST

भोपाल, 20 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 का पेश किया, जिसमें बहुविवाह पर रोक तथा सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। इससे पहले कांग्रेस सदस्यों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित भूमि सौदों को लेकर हंगामा किया।

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधेयक पर मंगलवार को चर्चा कराई जाएगी।

मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए मुख्यमंत्री यादव से जुड़े कथित भूमि खरीद का मामला उठाया, जिस पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के विधायकों और मंत्रियों ने कड़ा विरोध जताया।

हाल में एक समाचार में प्रकाशित खबर में दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री यादव और उनके परिजनों ने उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद बड़े पैमाने पर भूमि खरीदी। भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की स्थगन प्रस्ताव की मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह विषय स्थगन प्रस्ताव के तहत नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यह हालिया नहीं बल्कि पुराना मामला है। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए आसन के सामने आ गए।

विजयवर्गीय की दलील को खारिज करते हुए सिंघार ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव सिंहस्थ क्षेत्र से जुड़ी कथित भूमि खरीद और मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कथित जमीन खरीद के मुद्दे पर चर्चा के लिए लाया गया है।

कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

बाद में अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह तत्काल महत्व का विषय नहीं है।

तोमर ने कहा, ‘‘नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और दिनेश जैन की ओर से प्राप्त स्थगन प्रस्तावों की विषय-वस्तु का परीक्षण किया गया। स्थगन प्रस्ताव इसलिए अस्वीकार किया जाता है क्योंकि यह तत्काल महत्व का विषय नहीं है। सामान्यतः स्थगन प्रस्ताव वर्तमान घटनाओं और राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए लाए जाते हैं और परंपरा भी यही रही है।’’

इसके बाद सिंघार ने बयान जारी कर कहा कि विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने उज्जैन भूमि घोटाले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कथित भूमि खरीद के ‘‘गंभीर मामले’’ पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस पर बहस से बच रही है, जिसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

सिंघार ने कहा, ‘‘जो सरकार विधानसभा में सवालों का सामना करने से डरती है, वह जनता को क्या जवाब देगी? भाजपा सरकार विधानसभा को जवाबदेही का मंच नहीं बल्कि अपनी ढाल बनाना चाहती है।’’

उन्होंने मुख्यमंत्री से जुड़े कथित उज्जैन भूमि घोटाले पर सदन में ‘‘स्पष्ट जवाब’’ देने की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में जवाब नहीं मिलता, कांग्रेस सदन से लेकर सड़क तक हर लोकतांत्रिक मंच पर जनता की आवाज बनकर संघर्ष जारी रखेगी।

यूसीसी विधेयक-2026 का उल्लेख करते हुए सिंघार ने भाजपा सरकार पर ‘‘दोहरा रवैया’’ अपनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए यूसीसी लागू करने की जल्दबाजी में है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की बात आती है तो सरकार पूरी तरह मौन हो जाती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ओबीसी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर चर्चा से बच रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी जनहित, सामाजिक न्याय और जवाबदेही से जुड़े सभी मुद्दों को सदन के भीतर और बाहर मजबूती से उठाती रहेगी।

विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने संवाददाताओं से कहा कि यूसीसी विधेयक को ‘‘चुपके से’’ पेश किया गया, जबकि यह दिन के कार्यसूची में शामिल नहीं था।

इससे पहले रविवार को मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित कानून में तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय बनाने, बहुविवाह पर रोक लगाने तथा एक महीने के भीतर सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने तक के कारावास का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी अथवा सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) से जन्मे बच्चों को समान कानूनी अधिकार तथा सभी बच्चों को समान उत्तराधिकार अधिकार देने का प्रस्ताव है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

प्रस्तावित कानून में सहजीवन से जन्मे बच्चों को वैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव किया गया है। यदि पुरुष साथी महिला साथी को छोड़ देता है तो वह विधिक पत्नी की तरह सक्षम न्यायालय से भरण-पोषण की मांग कर सकेगी।

विधेयक में जनजातीय समुदायों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का भी प्रावधान किया गया है।

भाषा दिमो धीरज

धीरज