MP OBC Reservation News: OBC आरक्षण पर फैसले की उम्मीदों पर ग्रहण! हाईकोर्ट में इस वजह से टली फायनल हियरिंग, जानिए क्या है सुनवाई की नई तारीखें

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MP OBC Reservation News: जबलपुर: जबलपुर से OBC आरक्षण मामले में बड़ी खबर सामने आई है। फैसले की उम्मीद लगाए बैठे पक्षकारों को हाईकोर्ट से फिलहाल झटका लगा है।

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 05:28 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 05:28 PM IST

obc reservation/ image source: ibc24

HIGHLIGHTS
  • OBC सुनवाई फिर टली
  • अब मई में हियरिंग
  • HC ने रिकॉर्ड मांगा

MP OBC Reservation News: जबलपुर: जबलपुर से OBC आरक्षण मामले में बड़ी खबर सामने आई है। फैसले की उम्मीद लगाए बैठे पक्षकारों को हाईकोर्ट से फिलहाल झटका लगा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में OBC आरक्षण को लेकर होने वाली फाइनल सुनवाई टल गई है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं से संबंधित रिकॉर्ड समय पर पेश नहीं किए जाने के कारण सुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी। इस मामले पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई थीं और आज अहम बहस की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन तकनीकी कारणों से सुनवाई नहीं हो सकी।

MP OBC Reservation: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड ट्रांसफर करवाकर अगली तारीख तक पेश करे। साथ ही अदालत ने मामले की फाइनल हियरिंग के लिए नई तारीख भी तय कर दी है। अब OBC आरक्षण पर अंतिम सुनवाई 13, 14 और 15 मई को होगी। माना जा रहा है कि इन तारीखों पर विस्तृत बहस के बाद मामले में बड़ा फैसला सामने आ सकता है। प्रदेशभर के अभ्यर्थियों, छात्रों और विभिन्न संगठनों की नजरें अब अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।

OBC Reservation: जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की डिवीजन बेंच कर रही सुनवाई

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की डिवीजन बेंच कर रही है। कोर्ट ने OBC आरक्षण से जुड़ी 86 लंबित याचिकाओं को दो हिस्सों में बांटने के निर्देश दिए हैं, जिसमें एक पक्ष 27 फीसदी आरक्षण के समर्थन में और दूसरा विरोध में अपनी दलील रखेगा।

OBC Reservation: यह है पूरा मामला

मध्य प्रदेश में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण का मुद्दा पिछले कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। राज्य में पहले ओबीसी के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण लागू था, लेकिन साल 2019 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी को मिलाकर कुल आरक्षण करीब 63 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है। इसी आधार पर इस निर्णय को जबलपुर हाईकोर्ट में कई याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई, जिसके बाद अदालत ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी। तब से यह मामला लगातार न्यायालय में लंबित है और अब इसकी अंतिम सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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