नर्मदा व्यय समझौता: कांग्रेस ने श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, भाजपा का विपक्ष पर पलटवार

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नर्मदा व्यय समझौता: कांग्रेस ने श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, भाजपा का विपक्ष पर पलटवार

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  • Publish Date - July 9, 2026 / 04:06 PM IST,
    Updated On - July 9, 2026 / 04:06 PM IST

भोपाल, नौ जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लगभग तीन दशक से जारी पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय विवाद पर बनी सहमति पर सवाल उठाते हुए मध्यप्रदेश सरकार से इस पूरे मामले में श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में चर्चा कराने की मांग की।

सरोवर परियोजना की निर्माण लागत और संबंधित भुगतान विवाद को लेकर पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में समझौता हुआ है।

इसमें लंबित धनराशि के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान के रूप में हल किया गया है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह के दबाव में मध्यप्रदेश सरकार ने घुटने टेक दिए हैं और प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों तथा राज्य के वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की है।

उन्होंने कह, ‘‘नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है, इसलिए नर्मदा मैया पर पहला अधिकार मध्यप्रदेश की जनता का है लेकिन इसके बावजूद सरदार सरोवर परियोजना का सबसे अधिक नुकसान भी मध्यप्रदेश ने ही उठाया।’’

कांग्रेस नेता ने बताया कि संभावित 230 प्रभावित गांवों में से 178 गांव मध्यप्रदेश में, जबकि केवल 19 गांव गुजरात में हैं।

पटवारी ने कहा कि बांध के कारण मध्यप्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए, जबकि गुजरात में यह संख्या लगभग 4,000 परिवार है।

उन्होंने कहा कि इन्हीं नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तत्कालीन राज्य सरकार ने 7,669 करोड़ रुपये का दावा प्रस्तुत किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट मध्यप्रदेश सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपये देने पर सहमति जता दी।

पटवारी ने सरकार से पूछा कि इतने बड़े निर्णय पर विधानसभा, विपक्ष या प्रदेश की जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग करती है।’’

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए अभिमत के अनुसार पुनर्वास व्यय में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी।

भाजपा मीडिया विभाग के प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने ‘पीटीआई वीडियो’ सेवा से बातचीत में कहा कि इसके अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान गुजरात को करना पड़ता।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के बीच हुई बैठक में सर्वसम्मति से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत निर्धारित की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप अब मध्यप्रदेश को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।’’

अग्रवाल ने कांग्रेस पर दुष्प्रचार करने और जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया और दावा किया कि इस समझौते से मध्यप्रदेश के लगभग 1,268 करोड़ बचाए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि सहकारी संघवाद, संवाद और मजबूत नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे मध्यप्रदेश को सिंचाई, बिजली और नर्मदा जल का लाभ निरंतर मिलता रहेगा।’’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की राज्य इकाई ने भी इस समझौते को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह गुजरात को लाभ पहुंचाने के लिए न केवल प्रदेश के हितों की अनदेखी है बल्कि विस्थापितों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कना भी है।

माकपा के प्रदेश सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान में कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 7669.86 करोड़ रुपये का मुआवजा गुजरात सरकार से मांगा था, जबकि गुजरात सरकार 2001 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत महज 281 करोड़ का मुआवजा देने की बात कर रही थी।

उन्होंने दावा किया कि इस समझौते को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इतने दबाव में थे कि गुजरात सरकार द्वारा दिए जाने वाले 281 करोड़ रुपये के मुआवजे को भी छोड़ दिया है।

सिंह ने भाजपा सरकार के इस ‘‘समर्पण’’ की निंदा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को या तो गुजरात से या केंद्र सरकार से मुआवजा लेकर विस्थापितों के पुनर्वास की तुरंत व्यवस्था करना चाहिए।

भाषा ब्रजेन्द्र शफीक

शफीक