जीत का फॉर्मूला तलाशने बीजेपी में बैठकों का दौर जारी, संगठन में मंथन से निकला जीत का फार्मूला?

संगठन में मंथन से निकला जीत का फार्मूला? Round of meetings continues in BJP to find formula for victory

Modified Date: November 29, 2022 / 08:56 pm IST
Published Date: August 27, 2021 10:45 pm IST

भोपाल: मध्यप्रदेश में भले 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी पार्टी को ऊपर से लेकर नीचे तक एक्टिव करने की मुहिम में जुट गई है। जीत का फॉर्मूला तलाशने चिंतन और मंथन का दौर जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार बीजेपी संगठन की बड़ी बैठक हुई, सत्ता और संगठन में तालमेल बिठाना बैठक का प्रमुख एजेंडा रहा। बैठक में प्रभारी मंत्रियों को नसीहत दी गई कि वो 2 दिन प्रभार वाले जिलों में अनिवार्य रूप से रहे और जनता को बताए कि प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण लागू है।

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उपचुनाव से पहले मध्य प्रदेश बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है। जीत का फॉर्मूला तलाशने के लिए लगातार मंथन हो रहा है। जी हां मिशन 2023 से पहले अपनी जमीन मजबूत करने बीजेपी ने अभी कमर कस ली है। पार्टी को ऊपर से लेकर नीचे तक एक्टिव करने की मुहिम के तहत शुक्रवार को बीजेपी संगठन की बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत मौजूद रहे। बैठक में खास तौर पर सत्ता और संगठन के बीच समन्वय पर फोकस किया गया।

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बीजेपी की बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि संगठनात्मक स्तर पर जिलों के प्रभारी नियुक्त करने और सरकार के स्तर पर जिलों के प्रभारी मंत्री नियुक्त होने के बाद बैठक हुई। बैठक में संगठन और सत्ता के लिहाज से आने वाले समय में कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। दरअसल बीजेपी के सामने इस समय प्रदेश में कई चुनौती है, जिसमें खंडवा लोकसभा सीट और 3 विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। दमोह उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी इन उपचुनावों को काफी सीरियसली ले रही है। ओबीसी को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने का मुद्दा भी सियासी तौर पर गरमाया हुआ है, जिसे लेकर बीजेपी अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है। दूसरी ओर मंहगाई के मुद्दे पर कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ जिस तरीके से माहौल बनाया है उससे निपटना भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि कांग्रेस तंज कस रही है कि बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं है।

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सत्ता और संगठन में समन्वय के साथ ही कोरोना की दूसरी लहर में उसकी छवि को पहुंचे नुकसान लिए सरकार के पास करीब दो साल बचे हैं। ऐसे में सरकार को ऐसे फैसले लेने पड़ेंगे, जो उसकी छवि बदल सके। इसके लिए सरकार और संगठन में कसावट का दौर भी जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कि बीजेपी संगठन में मंथन से जीत का फॉर्मूला निकला?

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