Vande Matram Controversy Update: ‘जहां वंदे मातरम जरूरी, वहां से अपने बच्चों को निकाले’.. इमाम का विवादित फरमान, सरकार से की ये बड़ी मांग

Ads

Vande Matram Controversy Update: वंदे मातरम अनिवार्य करने के आदेश पर उज्जैन के इमाम ने विरोध जताया, सरकार से निर्देश वापस लेने की मांग।

  •  
  • Publish Date - February 14, 2026 / 02:33 PM IST,
    Updated On - February 14, 2026 / 03:27 PM IST

Vande Matram Controversy Update || Image- IANS file

HIGHLIGHTS
  • वंदे मातरम पर इमाम का विरोध
  • धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
  • सरकार से आदेश वापस लेने की मांग

उज्जैन: राष्ट्रगीत वंदे मातरम को अनिवार्य किये जाने के बाद मुस्लिम समुदाय के मौलाना, ईमाम और स्कॉलर्स की तरफ से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने रही है। दरअसल सरकार ने 28 जनवरी को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के बारे में नई गाइडलाइंस जारी की थी। नए निर्देशों के तहत यह गीत अब सरकारी कार्यक्रमों, (Vande Matram Controversy Update) स्कूलों और दूसरे औपचारिक आयोजनों में बजाया जाएगा। निर्देश में उल्लेख है कि, इस दौरान सभी मौजूद लोगों को इसके गायन के दौरान खड़ा होना होगा।

हालांकि उज्जैन के इमाम मुफ़्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने इस आदेश को इस्लाम विरोधी बताते हुए समुदाय के लिए एक विवादित नसीहत जारी की है। उन्होंने कहा कि यह निर्देश उनके धार्मिक आज़ादी पर हमला है। उनके अनुसार, वंदे मातरम के बोल हिंदुस्तान की ज़मीन के प्रति सम्मान दिखाते हैं और इस्लामी नज़रिए से मुसलमानों के लिए इबादत में अल्लाह के साथ किसी और को या किसी और चीज़ को जोड़ना जायज़ नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों को अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकालने पर विचार करना चाहिए जहाँ वंदे मातरम ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों को इस्लाम को मानते हुए किसी दूसरे भगवान की पूजा करने की इजाज़त नहीं दे सकते।” और यह फ़ैसला कानून के ख़िलाफ़ है। (Vande Matram Controversy Update) उन्होंने सरकार से इस आदेश पर फिर से सोचने और इसे वापस लेने की अपील की है।

गौरतलब है कि, इमाम मुफ़्ती सैय्यद नासिर अली नदवी पहले व्यक्ति नहीं है जिन्होंने वंदे मातरम् गीत का विरोध करते हुए इसे इस्लाम के खिलाफ बताया हो। इस कतार में कई बड़े मुस्लिम स्कॉलर शामिल है जिनका मानना है कि, यह उनकी आस्था, पूजा पद्धति और उपासना के नियमों के सीधे खिलाफ है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर “खुला हमला” : जमीयत उलेमा-ए-हिंद

इसी तरह प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बृहस्पतिवार को केंद्र के उस आदेश को “एकतरफा और मनमाना” बताया जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों को गाना अनिवार्य कर दिया गया है। जमीयत ने आरोप लगाया कि यह संविधान से मिली धार्मिक स्वतंत्रता पर “खुला हमला” है।

जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमान किसी को भी वंदे मातरम् गाने से नहीं रोकते, लेकिन गाने की कुछ पक्तियां ऐसी मान्यताओं पर आधारित हैं जो मातृभूमि को एक देवी के रूप में दिखाती हैं, जो एकेश्वरवादी धर्मों की मूल भावनाओं के खिलाफ हैं।

मदनी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना केंद्र सरकार का न केवल एक पक्षपाती और जबरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है।”

उन्होंने कहा, ‘‘मुसलमान किसी को वंदे मातरम् पढ़ने या उसकी धुन बजाने से नहीं रोकते, मगर उसकी कुछ पंक्तियां बहुदेववादी आस्था पर आधारित हैं और मातृभूमि को ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती हैं जो एकेश्वरवादी धर्म की आस्था से टकराती हैं, इसलिए मुसलमान, जो केवल एक अल्लाह की वंदना करता है, उसे इसे पढ़ने पर विवश करना संविधान की धारा 25 और उच्चतम न्यायालय के फैसलों का खुला उल्लंघन है।’’

जमीयत प्रमुख ने दावा किया कि इस गीत को अनिवार्य कर देना और ‘‘नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है। इस प्रकार के फैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं।’’

इन्हें भी पढ़ें:-

Q1. वंदे मातरम को लेकर नया सरकारी निर्देश क्या है?

सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम बजाना अनिवार्य किया गया।

Q2. उज्जैन के इमाम ने क्या आपत्ति जताई?

उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया।

Q3. इमाम ने सरकार से क्या मांग की?

सरकार से आदेश पर पुनर्विचार कर उसे वापस लेने की मांग।