Colonel Sophia Qureshi case | Photo Credit: IBC24
Vijay Shah Sophia Qureshi Case: भोपाल: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के परखच्चे उड़ा दिए, आतंकियों को नेस्तनाबूद कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल पूरे हो चुके हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के मंत्री विजय शाह की कर्नल सोफिया को लेकर की गई विवादित टिप्पणी मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस रजिस्टर्ड न होने को लेकर गहरी नाराजगी जताई। सर्वोच्च अदालत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत तो खीझ कर यहाँ तक कह गए कि- इनफ इज इनफ.. यानी बहुत हो गया। (Vijay Shah Sophia Qureshi Case) अब सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को डायरेक्शन दिए कि- उनके खिलाफ़ के केस रजिस्टर करिए। गौरतलब है कि इस मामले का स्वतः संज्ञान भी कोर्ट ने ही लिया था, लेकिन हर बार सॉलिसिटर जनरल एक नई कैफियत के साथ कोर्ट के सामने खड़े हो जाते हैं। ऐसे में कांग्रेस सवाल पूछ रही है कि महिलाओं और सेना दोनों के खिलाफ टिप्पणी करने वाले मंत्री को बचाने में सरकार और पार्टी दोनों क्यूँ लगी हुई हैं?
मंत्री विजय शाह का मामला चूँकि भाजपा और उसकी सरकार की तरफ़ से साशय लटकाया जा रहा है। (Vijay Shah Sophia Qureshi Case) लिहाज़ा BJP की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया तो आने से रही, लेकिन राजनीति को ठीक से समझने वाले कह रहे हैं कि – भाजपा ने विजय शाह प्रकरण को एक तरह से प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। भाजपा कभी भी दवाब में आकर इस्तीफ़ा नहीं लेती।
ऐसे में मंत्री विजय शाह के मामले को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। सवाल ये कि क्या सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की इस नाराजगी के मायने सरकार के लिए कुछ नहीं हैं? (Vijay Shah Sophia Qureshi Case) सवाल ये कि- क्या वाकई सरकार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है? सवाल ये कि- क्या विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई ना करने के पीछे, BJP को आदिवासी वोट बैंक की नाराज़गी का डर सता रहा है? सबसे बड़ा सवाल ये कि – क्या विजय शाह आदिवासियों एक सर्वमान्य नेता हैं भी या नहीं?
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