आंध्र प्रदेश: एसआईटी जांच में वर्ष 2018 में समूह-क के पद पर भर्ती से जुड़ी परीक्षा में अनियमितताओं का खुलासा

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आंध्र प्रदेश: एसआईटी जांच में वर्ष 2018 में समूह-क के पद पर भर्ती से जुड़ी परीक्षा में अनियमितताओं का खुलासा

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  • Publish Date - August 13, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - August 13, 2026 / 09:20 PM IST

अमरावती, 13 अगस्त (भाषा) आंध्र प्रदेश में समूह-क की नौकरियों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मूल्यांकन के कई चरणों में कथित अनियमितताओं का खुलासा किया है। इसमें अनधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं का इस्तेमाल, एक निजी रिसॉर्ट में कथित रूप से ‘मैन्युअल’ मूल्यांकन और ओएमआर मूल्यांकन शीट में बड़े पैमाने पर बदलाव शामिल हैं।

यह जांच आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) की ओर से 2018 में जारी अधिसूचना के माध्यम से समूह-क के 169 पदों पर की गई भर्ती से जुड़ी है। इसके लिए 1.14 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे।

एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘आंध्र प्रदेश में राज्य की सिविल सेवा परीक्षा के तहत वर्ष 2018 में समूह-क के पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा की जांच कर रहे एसआईटी ने कई चरणों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है।’

एसआईटी का गठन आंध्र प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में किया था। यह गठन उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद किया गया, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में छेड़छाड़ और अनियमितताओं के आरोपों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने को कहा गया था।

एसआईटी के अनुसार, कथित अनियमितताएं तीन अलग-अलग मूल्यांकन प्रक्रियाओं के दौरान हुईं। इनमें 2021 में किया गया मूल डिजिटल मूल्यांकन, उच्च न्यायालय के आदेश के बाद एक निजी रिसॉर्ट में कथित रूप से किया गया ‘मैन्युअल’ मूल्यांकन और तत्कालीन वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान 2022 में विजयवाड़ा में किया गया दूसरा ‘मैन्युअल’ मूल्यांकन शामिल है।

एसआईटी ने आरोप लगाया कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान अनधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं, निजी ई-मेल के इस्तेमाल और अंकों में विसंगतियों से जुड़े मामले सामने आए। उसने कहा कि परीक्षा के मुख्य चरण के डिजिटल मूल्यांकन के दौरान पहली बार बड़ी अनियमितताएं हुईं।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘एसआईटी ने पाया कि डिजिटल मूल्यांकन शुरू करने के फैसले के साथ-साथ इस प्रक्रिया के लिए नियुक्त मूल्यांकनकर्ताओं के पैनल को एपीपीएससी के अध्यक्ष की अनिवार्य मंजूरी प्राप्त नहीं थी।’

एसआईटी ने दावा किया कि सचिव द्वारा मंजूर किए गए 158 मूल्यांकनकर्ताओं के पैनल में से केवल 72 लोगों ने वास्तव में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया, जबकि स्वीकृत पैनल में शामिल नहीं रहे 25 अन्य लोगों ने भी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया और उन्हें भुगतान किया गया।

इसमें कहा गया कि स्वीकृत पैनल में भी मुख्य रूप से निजी स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक तथा व्याख्याता शामिल थे, जबकि एपीपीएससी कार्यालय नियमावली के अनुसार इसमें विश्वविद्यालय स्तर के विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाना था।

एसआईटी ने 173 गवाहों से पूछताछ की। जांच में फॉरेंसिक रिपोर्ट, वित्तीय रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप संदेशों, इलेक्ट्रॉनिक डेटा, मूल्यांकन रिकॉर्ड, वीडियो और गोंटूर-विजयवाड़ा स्थित रिसॉर्ट तथा विजयवाड़ा में हुई मूल्यांकन प्रक्रियाओं से जुड़े घटनाक्रम को दोबारा समझने की कवायद शामिल है।

भाषा तान्या संतोष

संतोष