मुंबई, 23 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के मुंबई में एक प्रकाशक ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ ने उन्हें 38 वर्ष पहले प्रकाशित एक पुस्तक के जरिए छत्रपति शिवाजी महाराज का “अपमान” करने को लेकर धमकी दी।
सोशल मीडिया पर एक ‘ऑडियो क्लिप’ वायरल हुई, जिसमें गायकवाड़ को कोल्हापुर के प्रकाशक प्रशांत अंबी के खिलाफ अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए सुना जा सकता है।
गायकवाड़ ने संवाददाताओं से कहा कि ‘ऑडियो क्लिप’ में आवाज उनकी ही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के दिवंगत नेता और तर्कवादी गोविंद पानसरे द्वारा लिखित ‘शिवाजी कोण होता’ पुस्तक पहली बार 1988 में प्रकाशित हुई थी। लोकवाङ्मय गृह द्वारा प्रकाशित यह मराठी की एक चर्चित और व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली पुस्तक है, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज को केवल एक हिंदू राजा के बजाय एक धर्मनिरपेक्ष, जन-नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस किताब की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं और इसके 75 से अधिक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।
अंबी ने बताया कि गायकवाड़ ने आधी रात के बाद उन्हें फोन किया और करीब नौ मिनट तक बातचीत के दौरान पुस्तक के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
अंबी ने आरोप लगाया कि गायकवाड़ ने उनकी जीभ काटने और घर में घुसकर हमला करने की धमकी दी, साथ ही कहा, “तुम्हें भी पानसरे जैसा अंजाम भुगतना पड़ेगा।”
पानसरे की 2015 में कोल्हापुर में उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह सुबह की सैर पर निकले थे।
कांग्रेस ने विधायक की इस धमकी को “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जांच कराने की मांग की।
बुलढाणा जिले से विधायक गायकवाड़ ने दावा किया कि अंबी ने उनके प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें अहंकारी बताया।
उन्होंने कहा, “उसकी जीभ काट देनी चाहिए। हम ऐसी किताबें नहीं पढ़ सकते जो छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करती हों। इस किताब को नष्ट कर देना चाहिए।”
गायकवाड़ ने कहा कि उनकी पत्नी को यह किताब मंगलवार को मिली, जिसके बाद उन्होंने इसे पढ़ा।
उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रकाशक को फोन किया था और वायरल ऑडियो क्लिप को “एडिट और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया” बताया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवाजी महाराज के प्रति “अपमानजनक” संदर्भों पर आपत्ति जताई थी।
महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि गायकवाड़ को पुराने विवादों को कुरेदना नहीं चाहिए।
गायकवाड़ पहले भी कई विवादों में घिरे रहे हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने गले में बाघ का दांत पहनकर यह दावा किया था कि उन्होंने 1987 में बाघ का शिकार किया था।
पिछले साल उन्होंने विधायक आवास के कैंटीन में बासी खाना परोसने के आरोप में एक कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था।
पिछले महीने गायकवाड़ ने दावा किया था कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के कल्याण के लिए “35 करोड़ रुपये के कमीशन” को छोड़ दिया, जिसके कारण उनके कई समर्थक साइकिल से चलने से आगे बढ़कर टोयोटा फॉर्च्यूनर चलाने लगे।
वर्ष 2024 में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरक्षण संबंधी बयान के बाद उनकी “जीभ काटकर लाने” वाले को 11 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस विभाग इतना भ्रष्ट है कि यदि 50 लाख रुपये की बरामदगी होती है, तो रिकॉर्ड में केवल 50 हजार रुपये ही दर्ज किए जाते हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस को “सबसे अक्षम विभाग” बताया था। एक मौके पर उन्होंने एक पुलिसकर्मी से अपनी कार धुलवाने को भी कहा था और इसका कारण यह बताया था कि उस पुलिसकर्मी ने गाड़ी के अंदर उल्टी कर दी थी।
कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने गायकवाड़ पर बुलढाणा जिले की छवि खराब करने का आरोप लगाया।
सपकाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि खुद को छत्रपति शिवाजी महाराज का वंशज बताने वाले गायकवाड़ ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है जो जनप्रतिनिधि के अनुरूप नहीं थी।
सपकाल ने राज्य सरकार से अंबी को तत्काल सुरक्षा देने और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जांच का आदेश देने की मांग की।
भाषा
राखी पवनेश
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