नागपुर, 15 मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को 2023 में कर्नाटक की एक जेल से फोन कर धमकी देने के मामले में नागपुर की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार के शर्मा ने कुख्यात अपराधी जयेश पुजारी उर्फ कांथा और आतंक के मामले में आरोपी अफसर पाशा को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दोषी करार दिया और सजा सुनाई। दोनों दोषी इस समय नागपुर केंद्रीय कारागार में कैद हैं।
अदालत ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 385 और 387 (जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति की हत्या या नुकसान पहुंचाने का डर दिखाना), 506 (2) और 507 (आपराधिक धमकी), 34 (सामान्य इरादा), साथ ही यूएपीए की धारा 10 (गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना), 13 (1) (गैरकानूनी गतिविधियों में भाग लेना) और 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश, उकसाना या भड़काना) के तहत दोषी पाया।
अदालत ने हालांकि, दोनों को यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी कृत्य में शामिल संगठन का सदस्य होने) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।
कांथा और पाशा को विभिन्न धाराओं के तहत दो से पांच साल तक की कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, सभी सजाएं साथ- साथ चलेंगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक धमकी देने के लिए पहला फोन कॉल 14 जनवरी, 2023 को गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय, नागपुर को किया गया। फोन कॉल के दौरान, आरोपियों ने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की मांग की और दाऊद इब्राहिम गिरोह से संबंध होने का दावा किया। उस समय, दोनों आरोपी कर्नाटक के बेलगावी स्थित हिंदलगा केंद्रीय कारागार में कैद थे।
उसने बताया कि 21 मार्च, 2023 को दूसरी बार फोन कॉल किया गया, जिसमें आरोपियों ने कथित तौर पर मंत्री को जान से मारने और 10 करोड़ रुपये का भुगतान न किए जाने पर बम विस्फोट की धमकी दी।
धमकी मिलने के बाद शहर की धंतोली पुलिस थाने ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए।
पाशा पहले कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था और उसका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था। उसने बांग्लादेश में बम बनाने का प्रशिक्षण भी लिया था। जांचकर्ताओं को उस पर 2022 के मंगलुरु कुकर बम विस्फोट मामले में संलिप्त आरोपियों को प्रशिक्षण देने का भी संदेह है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि मामले में तीसरा आरोपी मोहम्मद शाकिर अब भी फरार है और उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 299 के तहत पहले ही आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।
उसने बताया कि दोनों मामलों की सुनवाई 55 दिनों के भीतर पूरी हुई और इस दौरान 67 गवाहों ने अपनी गवाही दी।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश