सिनेमा आपको सपने देखने की शक्ति देता है, टीवी आपको अपनेपन का एहसास दिलाता है: अक्षय कुमार

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सिनेमा आपको सपने देखने की शक्ति देता है, टीवी आपको अपनेपन का एहसास दिलाता है: अक्षय कुमार

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 08:38 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 08:38 PM IST

(कोमल पंचमटिया)

मुंबई, 27 जनवरी (भाषा) बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने मशहूर गेम शो “व्हील ऑफ फॉर्च्यून” के भारतीय संस्करण के प्रस्तोता के रूप में टेलीविजन पर वापसी करते हुए कहा कि पारिवारिक दर्शकों के बीच लौटना घर वापसी जैसा लगता है।

अक्षय ने इससे पहले स्टंट पर आधारित शो ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी’ (2008-2011) की मेजबानी की थी और वह ‘मास्टरशेफ इंडिया’ (2010) में जज के तौर पर भी काम कर चुके हैं। अभिनेता ने कहा कि टीवी पारिवारिक दर्शकों को एकजुट कर सकता है और उन्हें उम्मीद है कि उनका नया शो इस जुड़ाव को बढ़ावा देगा।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “पिछले कई सालों में, मशहूर टेलीविजन कार्यक्रमों और उनके प्रस्तोताओं ने न सिर्फ मनोरंजन किया है, बल्कि भरोसा भी कायम किया है, पीढ़ियों को एक साथ जोड़ा है और ऐसे पल बनाए हैं जहां परिवार एक साथ बैठकर, खेल खेलकर जीत का जश्न मनाते हैं। मेरे लिए, ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ ऐसा है जैसे मैं अपने परिवार के साथ घर लौट आया हूं.. उन दर्शकों के बीच जो दिनभर की थकान मिटाने के लिए इकट्ठा होते हैं।”

‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ 1975 में अमेरिकी टेलीविजन पर शुरू हुआ था। इसमें प्रतियोगियों को अक्षरों का अनुमान लगाकर छिपे हुए शब्दों या वाक्यांशों को खोजने की चुनौती दी जाती है।

एक बड़ा घूमता हुआ पहिया प्रत्येक सही अक्षर का मान निर्धारित करता है और खिलाड़ी बारी-बारी से पहेलियों को सुलझाते हैं। जो प्रतियोगी सफलतापूर्वक पहेली को हल करता है और सबसे अधिक अंक प्राप्त करता है, उसे नकद पुरस्कार मिलता है।

कुमार के अनुसार, सिनेमा और टीवी दोनों अलग-अलग माध्यम हैं, जो दर्शकों का अलग-अलग तरीकों से मनोरंजन करते हैं।

अभिनेता ने कहा, ‘‘हालांकि, टेलीविजन एक अलग तरह का बंधन बनाता है। जहां सिनेमा आपको सपने दिखाता है, वहीं टेलीविजन आपको अपनेपन का एहसास दिलाता है। यह हर दिन घरों में पहुंचता है और लोगों की दिनचर्या और बातचीत का हिस्सा बन जाता है।”

कुमार ने कहा कि उन्होंने ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ की मेजबानी करने के विचार को तुरंत स्वीकार कर लिया, क्योंकि इससे उन्हें लोगों के साथ सीधे बातचीत करने का मौका मिला।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश