(विकास टोकाले और उमंग गडा)
मुंबई, नौ जनवरी (भाजपा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पटेल ने शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) के साथ वृहद स्तर पर गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया।
अजित पवार नीत राकांपा महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का हिस्सा है। हालांकि राकांपा ने शरद पवार की अगुवाई वाली राकांपा (शप) के साथ पुणे, पिंपरी-चिंचवड और परभणी में 15 जनवरी को होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन किया है।
अजित पवार नीत पार्टी के सदस्य पटेल ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)और नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा गठबंधन केवल भाजपा और राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के साथ है।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हम दिल्ली में मोदी के नेतृत्व में और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में काम करते हैं। इन (नगरपालिका स्तर के) स्थानीय गठबंधनों को बहुत ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।’’
पटेल से जब पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी पूर्व केंद्रीय मंत्री और राकांपा (शप)के नेता शरद पवार अगर राज्यसभा के लिए दोबारा चुनाव लड़ते हैं तो उनका समर्थन करेगी तो उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, दरअसल, उनकी पार्टी के पास एक उम्मीदवार को चुनने के लिए पर्याप्त विधायक हैं।’’
शरद पवार का मौजूदा राज्यसभा सदस्य कार्यकाल तीन महीने में समाप्त हो रहा है।
पूर्व उड्डयन मंत्री ने कहा, ‘‘यह तय करना हमारा काम नहीं है कि पवार निर्वाचित हों या नहीं, चाहे उनकी पार्टी द्वारा या सभी विपक्षी दलों द्वारा मिलकर। यह उनका फैसला है और इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’’
राकांपा नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में टिप्पणी की थी कि राजनीति में ‘दल-बदल’ व्यापक हो गया है और नेताओं को बहला-फुसलाकर या मजबूर करके पाला बदला जा रहा है।
इस सबंध में पूछे जाने पर पटेल ने कहा, ‘‘आपको याद रखना चाहिए कि महाराष्ट्र में नौ साल बाद स्थानीय चुनाव हो रहे हैं, इसलिए कई उम्मीदवार मैदान में हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सभी को लगता है कि वह चुनाव लड़ सकता है। अब, अगर उसकी पार्टी उसे टिकट नहीं दे पाती है, तो वह दूसरी पार्टी में चला जाता है।’’
पटेल ने कहा, ‘‘साथ ही, अगर किसी पार्टी के पास उपयुक्त उम्मीदवार नहीं होता और उसे कोई बना-बनाया अच्छा उम्मीदवार मिल जाता है, तो वे ऐसे उम्मीदवारों को भी ले लेते हैं। मेरा कहना यह है कि यह स्थानीय चुनाव है। इन चुनावों के संदर्भ में पार्टी बदलने के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए।’’
भाजपा के ‘शत प्रतिशत भाजपा’ नारे और गठबंधन राजनीति के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर पटेल ने कहा, ‘‘हर पार्टी को आगे बढ़ने का अधिकार है, और जाहिर है कि वे अधिक व्यापक मंच चाहेंगे। राजनीति में हर वोट और हर सीट जीतने का प्रयास किया जाता है। लेकिन ऐसा असल में नहीं होता।’’
राकांपा नेता ने कहा, ‘‘आज राष्ट्रीय स्तर की पार्टी भाजपा के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग पार्टियों के साथ गठबंधन हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में भाजपा को नीतीश कुमार की पार्टी की तुलना में दोगुने सीटें मिली थीं, लेकिन चूंकि यह एक गठबंधन था, इसलिए उन्होंने नीतीश कुमार को गठबंधन का नेता बनाने का फैसला किया और इसीलिए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।’’
पटेल ने कहा कि इस बार कहानी अलग है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने (राकांपा)भाजपा के साथ गठबंधन किया था, तब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे और भाजपा और शिंदे के पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत था।’’
राकांपा नेता ने कहा, ‘‘सरकार को स्थिर करने के लिए किसी अतिरिक्त विधायक या तीसरे दल की कोई आवश्यकता नहीं थी। लेकिन हमने चर्चा की, निर्णय लिया, भाजपा नेतृत्व के साथ एक परिपक्व और गंभीर बातचीत हुई, जिसके बाद यह तय हुआ कि हम उनके साथ गठबंधन करेंगे, और हमने सहर्ष प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।’’
पटेल ने कहा, ‘‘मेरा कहना यह है कि गठबंधन की राजनीति केवल संख्या या सुविधा के आधार पर नहीं चलती।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भाजपा के पास अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने की एक बहुत ही परिपक्व और ईमानदार प्रक्रिया है।’’
केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना पर राकांपा नेता ने कहा, ‘‘ऐसे कयास केवल मीडिया में लगाए जा रहे हैं। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, और मुझे नहीं लगता कि किसी को भी इस तरह की अटकलें लगानी चाहिए। आखिरकार, किसे शामिल किया जाएगा, यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी पद की मांग की है या मेरी पार्टी से किसी पद के लिए संपर्क किया गया है।’’
भाषा धीरज रंजन
रंजन