मुंबई, दो जुलाई (भाषा) एल्गार परिषद मामले के आरोपी, कार्यकर्ता वरवरा राव ने उनकी जमानत रद्द करने संबंधी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की याचिका का बृहस्पतिवार को विरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी का यह दावा कि उन्होंने और अन्य लोगों ने मुंबई प्रेस क्लब के एक कार्यक्रम में माओवादी विचारधारा का प्रचार किया था, ‘महज एक अनुमान’ है।
अधिवक्ता आर. सत्यनारायण के माध्यम से विशेष एनआईए अदालत के समक्ष दायर अपने जवाब में, राव ने कहा कि इस कार्यक्रम में चर्चा मुख्य रूप से कैदियों के जेल जीवन, जेलों में स्वास्थ्य की स्थिति, सह-आरोपी गौतम नवलखा को दिल्ली स्थानांतरित किए जाने और एक अन्य आरोपी सुरेंद्र गडलिंग की रिहाई की संभावनाओं पर केंद्रित थी।
एनआईए ने राव और सह-आरोपियों -वर्नन गोंजाल्विस, अरुण फरेरा और सुधा भारद्वाज- की जमानत रद्द करने की मांग की है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इन लोगों ने इस साल की शुरुआत में प्रेस क्लब के कार्यक्रम में शामिल होकर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
राव ने अपने जवाब में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि उन्होंने अन्य सह-आरोपियों को आमंत्रित किया था या उन्हें पहले से इस बात की जानकारी थी कि वे कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
जवाब में कहा गया, “आरोपी खुद एक आमंत्रित व्यक्ति था और उसे रात्रि भोजन पर आमंत्रित किया गया था। यह अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ों से स्पष्ट है, जिसमें बिल और जांच रिपोर्ट भी शामिल हैं।
इस आशंका पर कि बैठक का उद्देश्य माओवादी विचारधारा का प्रचार करना था, जवाब में कहा गया कि यह अभियोजन पक्ष का महज एक अनुमान था।
भाषा तान्या सुरेश
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