फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का उद्घाटन किया

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फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का उद्घाटन किया

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  • Publish Date - May 1, 2026 / 07:09 PM IST,
    Updated On - May 1, 2026 / 07:09 PM IST

मुंबई, एक मई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बहुप्रतीक्षित 13.3 किलोमीटर लंबी ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का शुक्रवार को उद्घाटन किया।

यह परियोजना खड़ी चढ़ाई वाले पहाड़ी दर्रे के हिस्से से बाहर-बाहर गुजरती है और इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा में सुधार लाना तथा दोनों प्रमुख शहरों (मुंबई और पुणे) के बीच यात्रा के समय को कम करना है।

फडणवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना को “इंजीनियरिंग का चमत्कार” करार देते हुए कहा कि 7,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह “ऐतिहासिक परियोजना” महाराष्ट्र में निवेश, कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देकर 70,000 करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था के निर्माण में मदद करेगी।

‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का उद्घाटन महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया। इस मौके पर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के खंडाला या भोर घाट (पहाड़ी दर्रा) खंड पर भारी यातायात जाम देखने को मिला। स्कूल की छुट्टियों और सप्ताहांत के मद्देनजर लोगों ने आयोजन के समय को लेकर सरकार से सवाल किए। इनमें से कई लोग सुबह से ही यातायात जाम में फंसे हुए थे।

बाद में फडणवीस ने अपने संबोधन में लोगों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया।

मुख्यमंत्री ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के खालापुर (रायगढ़ जिला) छोर पर ‘मिसिंग लिंक’ का उद्घाटन किया और इसके बाद परियोजना के लोनावला की ओर जाने वाले मार्ग पर कार चलाई। इस दौरान कार में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे।

‘मिसिंग लिंक’ परियोजना मुंबई की ओर खोपोली (रायगढ़ जिला) को पुणे जिले में लोनावला के पास स्थित कुसगांव से जोड़ती है। इससे एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से नियंत्रित प्रवेश वाला बनाए जाने और घाट यानी पहाड़ी दर्रे वाले हिस्से में यातायात दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) द्वारा 6,700 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस परियोजना में दो सुरंगें, दो पुल और ‘टाइगर वैली’ पर एक केबल आधारित पुल शामिल है। यह दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील खड़ी चढ़ाई वाले खंडाला या भोर घाट हिस्से के बाहर-बाहर नया मार्ग उपलब्ध कराती है। इस घाट पर विशेष रूप से सप्ताहांत और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में अक्सर भारी यातायात जाम लगता है।

फडणवीस ने कहा कि दुर्गम भूभाग में निर्मित इस परियोजना का पूरा होना “सपने के सच होने जैसा” है।

उन्होंने कहा, “इसे ‘मिसिंग लिंग’ (अधूरी कड़ी) नहीं, बल्कि ‘कनेक्टिंग लिंक’ (जोड़ने वाली कड़ी) कहना चाहिए। कुछ भी अधूरा नहीं है। सब कुछ पूरा है।”

फडणवीस ने कहा कि यह परियोजना मुंबई-पुणे के बीच ‘ज्ञान गलियारे’ के विकास में सहयोग देगी और आर्थिक गतिविधियों के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेगी।

उन्होंने कहा, “इंजीनियरिंग के इस चमत्कार के निर्माण में 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आया, लेकिन यह परियोजना 70,000 करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था के सृजन में योगदान दे सकती है।”

फडणवीस के मुताबिक, ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना में दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंग और देश का सबसे ऊंचा ‘केबल-स्टे’ पुल शामिल है, जो इसे महाराष्ट्र के लिए एक प्रतिष्ठित बुनियादी ढांचा बनाता है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना की परिकल्पना 2010 में की गई थी, लेकिन मार्ग के ऊपर एक झील को लेकर चिंताओं सहित अन्य आपत्तियों के कारण यह लगातार लटकती गई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “2015 में हमारी सरकार ने पहले के फैसले को पलट दिया और परियोजना को क्रियान्वित करने का निर्णय लिया।”

उन्होंने कहा कि ‘मिसिंग लिंक’ में मौजूद सुरंग को दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंग के रूप में ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में शामिल किया गया है।

फडणवीस ने कहा कि तकनीकी जटिलताओं के कारण परियोजना के ‘केबल-स्टे’ पुल वाले हिस्से को तैयार करने में लगभग तीन साल लग गए। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को पूरा करने में सात देशों से तकनीकी एवं इंजीनियरिंग सहयोग हासिल हुआ।

मुख्यमंत्री ने वाहन चालकों को एक्सप्रेसवे पर “लेन अनुशासन” बनाए रखने की चेतावनी दी और कहा कि इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा।

उन्होंने कहा, “लेन अनुशासन का पालन न करने पर भारी चालान जारी किया जाएगा।”

स्कूल की छुट्टियों और सप्ताहांत के कारण यातायात में अचानक वृद्धि होने से उद्घाटन समारोह से पहले एक्सप्रेसवे के पहाड़ी हिस्से में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। पुणे और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले खंड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, खासकर खड़ी ढलानों के आसपास के भीड़भाड़ वाले स्थानों पर।

फडणवीस ने जाम में फंसे लोगों से माफी मांगी। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस मार्ग पर दोबारा ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि पिछली सरकार द्वारा रोकी गई ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना अब बनकर तैयार है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि ‘मिसिंग लिंक’ से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, ईंधन बचेगा, प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी और दुर्घटनाओं का खतरा भी घटेगा।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।

एमएसआरडीसी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना 19.16 किलोमीटर लंबे आधुनिक गलियारे का हिस्सा है, जिसमें खालापुर और खोपोली इंटरचेंज के बीच 5.86 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले खंड को आठ लेन तक चौड़ा किया जाना भी शामिल है।

अधिकारियों ने कहा कि ‘मिसिंग लिंक’ से मुंबई-पुणे के बीच की दूरी करीब छह किलोमीटर घट जाएगी और यात्रा के समय में 20 से 30 मिनट की कमी आएगी।

अधिकारियों के अनुसार, नये मार्ग पर शुरुआत में केवल हल्के मोटर वाहनों और बसों को अनुमति दी जाएगी और भारी मालवाहक वाहन सुरक्षा कारणों से मौजूदा घाट मार्ग का ही इस्तेमाल करेंगे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि परियोजना के कारण रायगढ़ जिले के खालापुर टोल प्लाजा सहित कहीं भी टोल बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है।

एमएसआरडीसी ने बताया कि सुरंगों का निर्माण सुरंग बनाने की नयी ऑस्ट्रियाई पद्धति (एनएटीएम) से किया गया है। इसके लिए सह्याद्री पर्वत शृंखला में अलग-अलग तरह की चट्टानों पर व्यापक भूगर्भीय अध्ययन किए गए।

सुरंग संख्या एक की लंबाई 1.58 किलोमीटर है, जबकि सुरंग संख्या दो की लंबाई 8.86 किलोमीटर है।

अधिकारियों ने कहा कि ये सुरंगें करीब 23.5 मीटर चौड़ी हैं और दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, 650 मीटर लंबा पुल भारत का सबसे ऊंचा ‘केबल स्टे’ पुल है, जिसके खंभे 182 मीटर ऊंचे हैं और 240 केबल पर टिके हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस पुल का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण किया गया।

भाषा पारुल नेत्रपाल नरेश

नरेश