मुंबई, 31 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को मुद्रित अखबार और पत्रिकाएं न देने का अपना फैसला शुक्रवार को आंशिक रूप से वापस ले लिया। अब उन्हें पत्र-पत्रिकाओं के ऑनलाइन या मुद्रित संस्करण में से किसी एक विकल्प को चुनने की अनुमति मिल गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने यह संशोधन उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद किया, जिसमें कहा गया था कि एक सितंबर से मंत्रियों को केवल ऑनलाइन अखबारों पर ही निर्भर रहना होगा और इसका खर्च उनके संबंधित प्रशासनिक विभाग उठाएंगे।
संशोधन के अनुसार, 30 जुलाई को जारी शासनादेश के पैराग्राफ-तीन में बदलाव किया गया है। अब उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को अपने कार्यालयों और आधिकारिक आवासों के लिए केवल ‘‘ऑनलाइन’’ अखबार लेने की बाध्यता नहीं होगी, बल्कि वे अपनी सुविधानुसार ‘‘ऑनलाइन या मुद्रित’’ दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
इस सुधार के बाद उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के लिए फिर से मुद्रित अखबार पाने का विकल्प बहाल हो गया है, जिससे बृहस्पतिवार के आदेश के जरिये शुरू की गई ‘सिर्फ ऑनलाइन’ वाली व्यवस्था बदल गई है।
शुरुआती फ़ैसले के तहत, जीएडी ने कहा था कि उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के कार्यालय और सरकारी आवासों पर मुद्रित अख़बारों और पत्रिकाओं की आपूर्ति और उन्हें केंद्रीय स्तर पर खरीदने की मौजूदा प्रणाली एक सितंबर से बंद हो जाएगी।
विभाग ने मंत्रियों को इसके बजाय ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेने का निर्देश दिया था, जिसका खर्च उनके संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा बिल जमा करने के बाद कार्यालय व्यय से पूरा किया जाना था।
हालांकि, 30 जुलाई के शासनादेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए एक अपवाद रखा गया था, जिसके तहत उनके कार्यालय और आधिकारिक आवास पर मुद्रित अखबारों और पत्रिकाओं की आपूर्ति जारी रखने की अनुमति दी गई थी, और इसका खर्च जीएडी द्वारा वहन किया जाना था।
जीएडी के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अख़बारों और पत्रिकाओं पर सालाना खर्च लगभग 22 लाख रुपये था, जिसमें से मुख्यमंत्री कार्यालय का खर्च हर महीने लगभग 12,000 से 15,000 रुपये था। अधिकारी ने कहा था कि नयी प्रणाली लागू होने से पहले मंत्रियों को एक महीने का समय दिया जा रहा था।
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