टीसीएस मामले की आरोपी निदा खान को अंतरिम राहत नहीं, अदालत ने याचिका पर पुलिस से मांगा जवाब

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टीसीएस मामले की आरोपी निदा खान को अंतरिम राहत नहीं, अदालत ने याचिका पर पुलिस से मांगा जवाब

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  • Publish Date - April 20, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - April 20, 2026 / 07:08 PM IST

नासिक (महाराष्ट्र), 20 अप्रैल (भाषा) टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक इकाई में कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाये जाने के मामले में आरोपी निदा खान को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से यहां की एक अदालत ने सोमवार को इनकार कर दिया और पुलिस को 27 अप्रैल तक उसकी याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी), जो आईटी कंपनी की नासिक इकाई में छेड़छाड़ और परेशान करने के नौ मामलों की जांच कर रही है, ने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में खान की तलाश शुरू कर दी है।

शनिवार को, निदा खान ने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत और सुनवाई लंबित रहने तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत के लिए नासिक की अदालत का रुख किया था।

सोमवार को, सुनवाई के दौरान खान के वकील राहुल कसलीवाल ने अंतरिम राहत की मांग की।

हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी ने अंतरिम याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं किया और पुलिस तथा शिकायतकर्ता को खान की मुख्य याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल के लिए निर्धारित कर दी।

टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के शोषण, जबरन धर्मांतरण कराने के प्रयास, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के सामने आने के बाद, एसआईटी ने नौ प्राथमिकी दर्ज कर एक महिला प्रबंधक समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

नासिक पुलिस ने खान का पता लगाने के लिए तीन टीम गठित की है।

खान पर व्हाट्सऐप ग्रुप में कर्मचारियों को निशाना बनाने और उन पर नमाज पढ़ने और मांसाहारी भोजन करने का दबाव डालने का आरोप है।

प्राथमिकी के अनुसार, खान ने महिला कर्मचारियों को इस्लामी परंपराओं के अनुरूप वस्त्र पहनने और व्यवहार करने की कथित तौर पर सलाह दी थी।

कुछ पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें नमाज पढ़ने, खान-पान की आदतों में बदलाव करने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने सहित धार्मिक रीति-रिवाजों को अपनाने के लिए मजबूर किया गया या दबाव डाला गया।

यौन उत्पीड़न और मानहानि से जुड़े भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के अलावा, खान पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जाति सूचक अपशब्दों या अपमान से संबंधित कोई आरोप नहीं हैं, इसलिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम लागू नहीं होता।

इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, यहां की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने मामले के दो अन्य आरोपियों, रजा रफीक मेमन (35) और शफी बिखान शेख (36) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मामले में गिरफ्तार किये गए अन्य लोग फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं करने की उसकी लंबे समय से नीति रही है और नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न में कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप