न्यायधीशों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक मामला है,सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं: न्यायमूर्ति भुइयां

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न्यायधीशों का तबादला न्यायपालिका का आंतरिक मामला है,सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं: न्यायमूर्ति भुइयां

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  • Publish Date - January 24, 2026 / 10:28 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 10:28 PM IST

पुणे, 24 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश उज्जल भुइयां ने शनिवार को कहा कि न्यायाधीशों का स्थानांतरण न्यायपालिका का आंतरिक मामला है और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।

यहां आईएलएस विधि महाविद्यालय में जी.वी. पंडित स्मृति व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से ‘कोई समझौता नहीं की जा सकती है।’

न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा,‘‘न्यायधीश का स्थानांतरण हमेशा न्याय के बेहतर प्रबंधन के लिए होता है। यह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है। इस प्रक्रिया में सरकार का कोई दखल नहीं हो सकता है।’’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया,‘‘ न्यायधीशों के स्थानांतरण और नियुक्ति में केंद्र सरकार का कोई दखल नहीं हो सकता। वह यह नहीं कह सकती कि किसी विशेष न्यायधीश को स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए या उसे किस उच्च न्यायालय में भेजा जाना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान का मूल तत्व है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। न्यायाधीश न्यायपालिका के सदस्य हैं, जिन्हें यह सुनिश्चित करना है कि इसकी स्वतंत्रता हर हाल में बनी रहे, ताकि इसकी प्रासंगिकता एवं वैधता निरंतर कायम रहे।”

न्यायमूर्ति भुइयां ने यह भी कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम अपनी विश्वसनीयता खो देते हैं, तो न्यायपालिका का कुछ भी नहीं बचा रहेगा। यह मौजूद रहेगा, न्यायधीश मौजूद रहेंगे, अदालतें मौजूद रहेंगी, यह निर्णय लेगी, लेकिन इसकी आत्मा नहीं होगी।”

भाषा जोहेब राजकुमार

राजकुमार