मुंबई, 22 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र में विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)-शरद चंद्र पवार (शप) ने बुधवार को केंद्र सरकार पर पिछले एक साल में पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने में विफल रहने का आरोप लगाया और सवाल किया कि सरकार हमले के मास्टरमाइंड को फांसी कब देगी।
राकांपा (शप) प्रवक्ता महेश तापसे ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एक बयान में पहलगाम हमले के पीड़ितों के परिवारों को न्याय की स्थिति के बारे में भी जानना चाहा।
ठीक एक साल पहले, पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए एक क्रूर आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें से अधिकांश देश के विभिन्न क्षेत्रों के पर्यटक थे।
हाल के समय में नागरिकों पर हुए सबसे वीभत्स हमलों में से एक माने जाने वाले इस भयावह हमले को लेकर पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।
तापसे ने सवाल किया, ‘‘पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड साजिद जट्ट को फांसी कब दी जाएगी?”
उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी 40 मिनट की हालिया कथित टेलीफोन बातचीत में जट्ट के प्रत्यर्पण के लिए पाकिस्तान पर राजनयिक दबाव डालने का जिक्र क्यों नहीं किया।
तापसे ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में इस तरह की उच्च स्तरीय बातचीत से ठोस परिणाम मिल सकते हैं। बिना परिणाम के मात्र बातचीत भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।”
तापसे ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर भाजपा द्वारा निशाना साधने पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ दल की ‘चुनिंदा मुद्दों पर आक्रोश’ की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ जारी अत्याचारों को नजरअंदाज किया जबकि वह महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।
राकांपा (शप) प्रवक्ता ने दावा किया, ‘‘भाजपा मगरमच्छ के आंसू बहा रही है क्योंकि वह महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक की आड़ में संसद की सीट बढ़ाकर 850 करना चाहती थी। ‘इंडिया’ गठबंधन को इसकी भनक लग गई और भाजपा अपनी योजना को अंजाम देने में नाकाम रही।’’
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था।
सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
भाषा अमित जितेंद्र
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