Chaitra Navratri 2026 Kalash Visarjan: कलश विसर्जन कब और कैसे करें, जानिए शुभ मुहूर्त और सरल विधि, ताकि पूजा हो सम्पूर्ण और फलदायी!

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Chaitra Navratri 2026 Kalash Visarjan: महानवमी के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन हो गया है। अब लोग जानना चाहते हैं कि नवरात्रि का कलश विसर्जन कब किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है, ताकि पूजा पूर्ण और फल प्राप्त हो सके।

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  • Publish Date - March 27, 2026 / 12:58 PM IST,
    Updated On - March 27, 2026 / 01:14 PM IST

(Chaitra Navratri 2026 Kalash Visarjan/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • चैत्र नवरात्रि का समापन महानवमी के साथ हुआ।
  • नवरात्रि का कलश विसर्जन 27 और 28 मार्च को शुभ है।
  • मिट्टी और धातु कलश दोनों के लिए अलग विसर्जन विधि है।

Chaitra Navratri 2026 Kalash Visarjan: आज महानवमी तिथि के समाप्त होने के साथ ही चैत्र नवरात्रि का समापन हो गया। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को ही महानवमी कहा जाता है। इस दिन राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं ने आज मां सिद्धिदात्री की पूजा की, कन्या पूजन किया और नवरात्रि का हवन भी संपन्न किया। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जिसे पूजा के समापन पर विसर्जित किया जाता है।

कलश विसर्जन कब किया जाएगा?

अब लोग यह जानना चाहते हैं कि नवरात्रि के कलश का विसर्जन कब किया जाएगा। नवमी तिथि की पूजा आज पूरी हो चुकी है, इसलिए कलश विसर्जन के लिए आज 27 मार्च का दिन शुभ माना गया है। सुबह 10 बजकर 06 मिनट के बाद दशमी तिथि लग चुकी है, इसलिए भक्त आज कलश विसर्जन कर सकते हैं। जो लोग पूरे नौ दिनों का व्रत रख चुके हैं, वे कल, यानी 28 मार्च को कलश विसर्जन कर सकते हैं।

कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

28 मार्च को दशमी तिथि सुबह 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इस समय तक नवरात्रि के कलश का विसर्जन करना शुभ माना जाता है। इसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी, इसलिए अगर किसी ने कलश आज या कल विसर्जित नहीं किया है, तो उसे 28 मार्च सुबह 8:48 बजे से पहले विसर्जित करना चाहिए। शुभ मुहूर्त में कलश विसर्जन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

कलश विसर्जन की विधि

कलश विसर्जन करने से पहले कलश के ऊपर रखा नारियल हटा दें। उसके बाद कलश में बोए गए जौ को काटें। फिर कलश में रखे पवित्र जल में आम के पत्ते डालकर पूरे घर में छिड़काव करें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मिट्टी का कलश स्थापित करने वाले श्रद्धालु माता दुर्गा का ध्यान करते हुए कलश विसर्जित करें।

धातु कलश का विसर्जन और मंत्र

धातु का कलश स्थापित करने वाले उसमें रखी सामग्री को अलग कर विसर्जित करें। विसर्जन के दौरान मंत्र ‘गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थानं परमेश्वरी, पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च’ का जाप करें। कलश विसर्जन के बाद माता का ध्यान करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है।

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नवरात्रि का कलश विसर्जन कब किया जाएगा?

कलश विसर्जन 27 मार्च दोपहर तक या 28 मार्च सुबह 8:48 बजे तक किया जा सकता है।

मिट्टी और धातु कलश के विसर्जन में क्या अंतर है?

मिट्टी के कलश को माता दुर्गा का ध्यान करते हुए विसर्जित किया जाता है। धातु कलश में रखी सामग्री को अलग कर मंत्र का जाप करते हुए विसर्जित करें।

कलश विसर्जन की सामान्य विधि क्या है?

नारियल हटाएं, बोए गए जौ को काटें, पवित्र जल में आम के पत्ते डालकर घर में छिड़कें और माता का ध्यान करें।

कलश विसर्जन करने से क्या लाभ होते हैं?

यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है, नकारात्मकता दूर करता है और पूजा को पूर्ण बनाता है।