Nag Panchami 2026: आखिर पृथ्वी पर कैसे आए शक्तिशाली नाग? जानिए धरती पर अष्टनागों के जन्म का वो रहस्य, जिसे सुनकर देवता भी चौंक गए!

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Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में नाग पंचमी पर सांपों की पूजा तो सब करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाताल के इन इच्छाधारी नागों का जन्म कैसे हुआ था? आइये विस्तार से जानते हैं..

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 06:05 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 06:10 PM IST

Nag Panchami 2026/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • नाग पंचमी: नाग देवताओं की दिव्य पूजा का पर्व!
  • पृथ्वी का भार ढोने वाले अनंत नाग की कथा!

Nag Panchami 2026आज नाग पंचमी का त्यौहार है, जिसे हिंदू धर्म में नाग देवताओं की पूजा और सम्मान के लिए मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से सांपों का डर दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। महाभारत और पुराणों के अनुसार, ये नाग कोई साधारण सांप नहीं हैं, बल्कि ये दिव्य शक्तियों वाले आधे मानव और आधे सर्प के रूप हैं, जो पाताल लोक में रहकर प्रकृति और धन की रक्षा करते हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में नागों का इतिहास बेहद रहस्यमयी है। विशेष रूप से अष्टकुल या अष्टनाग (शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कार्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक) को पृथ्वी पर नागवंश का आदि-पूर्वज माना जाता है। आज हम जानेंगे, सृष्टि के शुरुआती दौर की वह रोचक पौराणिक कथा, जो बताती है कि देवताओं और ऋषियों के काल में इन शक्तिशाली दिव्य नागों का जन्म कैसे हुआ..

Nag Panchami Vrat Katha: कैसे हुई नागों की उत्पत्ति?

महाभारत की कहानी के मुताबिक, सृष्टि की शुरुआत में दक्ष प्रजापति की दो सुंदर और समझदार बेटियाँ थीं, जिनका नाम था कद्रू और विनता। दोनों बहनों का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ, जो ब्रह्माजी के मानस पुत्र और सृष्टि के मुख्य प्रजापतियों में से एक थे। एक दिन महर्षि कश्यप अपनी दोनों पत्नियों के प्रसन्न होकर बोले “तुम दोनों अपनी-अपनी इच्छा के अनुसार वर मांग सकती हो।”

महर्षि कश्यप की बात सुनते साथ कद्रू ने तुरंत कहा कि उसे एक हज़ार ऐसे पुत्र चाहिए जो ताक़त और बहादुरी में बराबर हों। वहीं विनता ने समझदारी पूर्वक, कद्रू के पुत्रों से भी अधिक बलवान, बुद्धिमान और श्रेष्ठ सिर्फ दो पुत्रों का वरदान माँगा। महर्षि कश्यप ने दोनों को उनकी इच्छा के अनुसार वरदान दे दिया।

वरदान पाकर दोनों बहनें बहुत खुश हुईं। कुछ समय बाद, कद्रू ने एक हज़ार अंडे दिए जबकि विनता ने सिर्फ दो अंडे दिए। दोनों ने अपने अण्डों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें गर्म बर्तनों में रख दिया। लगभग पाँच सौ वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद, कद्रू के अंडे फूटने लगे और उनमें से एक-एक करके ताक़तवर नाग पुत्र जन्म लेने लगे। इन नागों में से सबसे ज्येष्ठ और सबसे प्रभावशाली शेषनाग थे, जिन्हें अनंत भी कहा जाता है।

शेषनाग के अलावा वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक नाम के मुख्य नाग पैदा हुए। इन्हीं आठों को अष्टनाग या अष्टकुल कहा जाता है, जिनसे पृथ्वी पर नागवंश की शुरुआत हुई। ये नाग पाताल लोक में निवास करने वाले, बहुत जहरीले और कई फनों वाले होते थे, और इनमें एक खास खूबी थी कि ये जरूरत पड़ने पर इंसानों का रूप भी बदल सकते थे।

लेकिन विनता के अपने दोनों अण्डों के न फूटने के कारण अधीर हो गयी, उसने जल्दबाज़ी में एक अंडा फोड़ दिया। अंडा फूटते ही उसमें से एक अर्धविकसित बालक निकला, जिसका ऊपरी शरीर तो पूर्ण रूप से विकसित था, किन्तु निचला हिस्सा पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था। यह बालक अरुण था, जो बाद में सूर्यदेव के रथ का सारथि बना।

अन्य नागों और अरुण का जन्म!

अरुण ने अपनी माँ की जल्दबाज़ी पर गुस्सा होकर उन्हें श्राप दिया और कहा कि “माँ तुम्हारे धीरज खोने की वजह से मेरा शरीर पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया”, इसलिए तुम्हें अपनी सौत कद्रू की दासी बनाना पड़ेगा। लेकिन, तुम्हारा दूसरा पुत्र तुम्हें इस श्राप से मुक्त कराएगा। विनता के अगले पाँच सौ वर्ष और इंतज़ार किया, जिसके बाद दूसरा अंडा फूटा और उसमें से गरुड़ का जन्म हुआ, जो अपनी अद्भुत ताक़त और तेज़ रफ़्तार की वजह से भगवान विष्णु के वाहन बने। इस तरह, एक ही पिता की संतान होने के बावजूद नाग और गरुड़ हमेशा के लिए एक-दूसरे के पक्के दुश्मन बन गए।

इसके बाद वह घटना घटी जिसके कारण विनता को कद्रू की दासी बनना पड़ा। एक बार जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तो उसमें से अनेक दिव्य वस्तुओं के साथ एक अद्भुत सफ़ेद घोडा निकला, जिसका नाम ‘उचैःश्रवा’ था। उसे देखकर कद्रू ने विनता से पूछा, ” बहन, बताओ इस घोड़े का रंग कैसा है?” विनता ने कहा, “यह घोडा तो पूरा सफ़ेद है।” लेकिन, कद्रू ने कहा, “घोडा को पूरा सफ़ेद है किन्तु उसकी पूँछ काली है।”

इस बात पर दोनों बहनों में बहस हो गई और उन्होंने शर्त लगा ली कि जिसकी भी बात गलत साबित होगी, वह दूसरी बहन की दासी बनेगी। शर्त लगाने के बाद, दोनों बहनों ने तय किया कि वे अगले दिन जाकर घोड़े को खुद देखेंगी। कद्रू हर हाल में विनता को अपनी दासी बनाना चाहती थी, इसलिए उसने मन ही मन एक चाल चली। उसने अपने एक हज़ार नाग पुत्रों को हुक्म दिया कि वे काले बालों का रूप धारण करके उचैःश्रवा घोड़े की पूँछ से लिपट जाएँ, ताकि पूँछ का रंग काला दिखाई देने लगे।

लेकिन, कद्रू के कई पुत्रों ने अपनी माँ की इस छलपूर्ण आज्ञा को मानने से मना कर दिया। इस बात पर क्रोधित कद्रू ने अपने ही पुत्रों को कठोर श्राप दे दिया कि वे सब एक दिन राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ की अग्नि में जलकर भस्म हो जाएंगे। कद्रू के इस श्राप से सभी नाग पुत्र चिंतित हो गए, तभी कार्कोटक नाग ने कद्रू से कहा, “माँ, आप फ़िक्र मत करो, मैं काले बालों का रूप लेकर उचैःश्रवा की पूँछ से लिपट जाऊँगा, जिससे पूँछ काली दिखने लगेगी।

कद्रू यह सुनकर प्रसन्न हो गई। अगले दिन सूर्योदय होते ही दोनों बहनें अपनी शर्त के अनुसार, घोड़े को देखने समुद्र के पार पहुंची। वहां पहुंचकर विनता ने देखा कि घोड़े का शरीर तो पूरा सफ़ेद है लेकिन उसकी पूँछ काली है, जिससे वह समझ गई कि वह शर्त हार चुकी है। फिर उसने अपनी बहन कद्रू से साफ़ कह दिया कि वह बाज़ी हार चुकी है और शर्त के अनुसार, वह अब कद्रू की दासी बनकर रहेगी।

विनता की दासता से मुक्ति

इस तरह विनता को अपनी बहन कद्रू की दासी बनकर रहना पड़ा। कुछ समय बाद जब गरुड़ बड़े हुए, तो उन्हें अपनी माँ की इस दासी वाली जिंदगी के बारे में पता चला। अपनी माँ को आज़ाद कराने के लिए गरुड़ ने अद्‌भुत बहादुरी दिखाई। वे देवताओं से अमृत लेकर आए और उसे नागों के सामने रखकर अपनी माँ विनता को दासी के जीवन से मुक्त कराया। इसी महान पराक्रम की वजह से हिंदू धर्म में गरुड़ जी को अत्यंत शक्तिशाली एवं पूजनीय माना गया।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

नाग पंचमी हिंदू धर्म में नाग देवताओं की पूजा और सम्मान का पर्व है। माना जाता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से साँपों का भय दूर होता है तथा घर में सुख, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है।

नागों की उत्पत्ति कैसे हुई?

महाभारत के अनुसार, दक्ष प्रजापति की पुत्री कद्रू ने महर्षि कश्यप से एक हजार शक्तिशाली पुत्रों का वरदान माँगा। कद्रू ने एक हजार अंडे दिए, जिनसे लगभग पाँच सौ वर्षों बाद शेषनाग, वासुकी, तक्षक सहित एक हजार नागों का जन्म हुआ। इन्हीं से नागवंश की शुरुआत हुई।

अष्टनाग या अष्टकुल किसे कहा जाता है?

अष्टनाग वे आठ प्रमुख नाग हैं जिनसे पृथ्वी पर नागवंश चला। इनमें शेषनाग (अनंत), वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक शामिल हैं।

कद्रू ने अपने पुत्रों को क्यों शाप दिया?

उचैःश्रवा घोड़े की पूँछ के रंग को लेकर कद्रू और विनता के बीच शर्त लगी थी। कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वे काले बाल बनकर घोड़े की पूँछ से लिपट जाएँ। कई नागों ने मना कर दिया, जिससे क्रोधित होकर कद्रू ने उन्हें शाप दिया कि वे राजा जनमेजय के सर्प-यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएँगे।

गरुड़ और नागों में शत्रुता क्यों है?

गरुड़ और नाग दोनों महर्षि कश्यप की संतान हैं। कद्रू (नागों की माता) और विनता (गरुड़ की माता) के बीच छल और शर्त के कारण विनता को कद्रू की दासी बनना पड़ा। बाद में गरुड़ ने माँ को मुक्त कराने के लिए नागों से अमृत का सौदा किया, जिससे दोनों में शाश्वत शत्रुता हो गई।