बिना दबाव के क्रिकेट उबाऊ है : मौरिस

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बिना दबाव के क्रिकेट उबाऊ है : मौरिस

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  • Publish Date - October 23, 2020 / 01:37 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:56 PM IST

दुबई, 23 अक्टूबर (भाषा) हरफनमौला क्रिस मौरिस के लिये बिना दबाव के क्रिकेट उबाऊ है और उन्हें लगता है कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) में उनकी भूमिका पर स्पष्टता से उन्हें अभी तक इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार प्रदर्शन करने में मदद मिली है।

मौरिस की हमेशा इंडियन प्रीमियर लीग में काफी मांग रही है और दिल्ली कैपिटल्स के साथ चार सत्र खेलने के बाद वह अब आरसीबी में हैं। वह मांसपेशियों में खिंचाव के कारण सत्र के शुरूआती चार मैचों में नहीं खेल पाये थे। चोट से उबरने के बाद मैदान में उतरे इस दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी ने तुरंत ही असर दिखाना शुरू किया और अब तक पांच रन प्रति ओवर के बेहतरीन इकोनॉमी रेट से पांच मैचों में नौ विकेट झटक लिये हैं।

यह पूछने पर कि इस सत्र में उनके लिये क्या कारगर रहा? तो मौरिस ने शुक्रवार को ऑनलाइन मीडिया कांफ्रेंस में कहा, ‘‘कोविड-19 के कारण लगा ब्रेक शरीर और मानिसक रूप से तरोताजा होने के लिये दोनों के लिये अच्छा था। फिर से खेलना अच्छा है और ऐसा सिर्फ योजना को लेकर स्पष्टता से हुआ कि किस तरह से इसका कार्यान्वयन किये जाने की जरूरत है। ’’

तैंतीस साल के इस क्रिकेटर ने कहा, ‘‘हम काफी ‘होमवर्क’ करते हैं। जब तक मैच होता है, हम जान जाते हैं कि क्या जरूरी है। हमारी योजना काफी स्पष्ट रही है और अगर कुछ गलत होता है तो बी योजना तैयार रहती है, अगर यह भी काम नहीं करती तो हमारे पास सी योजना होती है और यह भी विफल होती है तो मेरा ओवर भी खत्म हो जाता है (हंसते हुए)। ’’

मौरिस ने कहा कि चोट के बाद रिहैबिलिटेशन का समय उनके लिये काफी मुश्किल था लेकिन सहयोगी स्टाफ ने इसे काफी आसान बना दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘इतना महत्वपूर्ण महसूस करना हमेशा अच्छा होता है। मेडिकल स्टॉफ ने शानदार काम किया। यह मेरे लिये नयी चोट थी। जब मैं बल्लेबाजी कर रहा था तो मेरे पेट की मांसपेशी अकड़ गयी। साढ़े चार हफ्ते काफी मुश्किल थे। ’’

मौरिस ने कहा, ‘‘मेरे कमरे में उपचार के लिये एक मशीन थी। मैं प्रत्येक दो घंटे में बर्फ लगाता। यह काफी मुश्किल समय था और अब बिना दर्द के खेलकर सचमुच काफी खुश हूं। ’’

शुरू में और डेथ ओवरों में गेंदबाजी के बारे में पूछने पर मौरिस ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि मैं अच्छी स्थिति में हूं। बिना किसी दबाव के क्रिकेट उबाऊ है। बतौर क्रिकेटर आप हमेशा अपनी परीक्षा चाहते हो। ’’

भाषा नमिता मोना

मोना