नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) संसद की एक समिति ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्यों के लिए पद छोड़ने के बाद नई नौकरी स्वीकार करने से पहले ‘कूलिंग-ऑफ’ यानी अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष करने की सिफारिश की है, ताकि हितों के टकराव की संभावना कम हो सके।
समिति ने तेजी से लोकप्रिय हो रही ‘वर्चुअल’ डिजिटल संपत्ति (वीडीए) यानी क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए भी व्यापक नियामकीय रूपरेखा तैयार करने की आवश्यकता बतायी है, जिससे खुदरा निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके।
सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने ‘प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025’ पर अपनी रिपोर्ट बृहस्पतिवार को संसद को सौंपी।
पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पेश इस विधेयक का उद्देश्य सेबी अधिनियम, 1992, प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 और डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 को एकीकृत कर एक कानून बनाना है।
समिति ने सिफारिश की है कि सेबी चेयरमैन और पूर्णकालिक सदस्य पद छोड़ने के बाद प्रतिभूति बाजार से जुड़े किसी सेवा प्रदाता, बाजार प्रतिभागी या अन्य संबंधित संस्थान में नियुक्ति लेने से पहले दो वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि पूरी करें ताकि हितों के टकराव की संभावना कम हो सके।
इसके अलावा, समिति ने वित्तीय क्षेत्र नियामकीय नियुक्ति खोज समिति जैसी पारदर्शी और योग्यता आधारित व्यवस्था के माध्यम से सेबी निदेशक मंडल (बोर्ड) के सदस्यों की नियुक्ति को संस्थागत रूप देने की भी सिफारिश की है।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि बाजार नियामक के अधिकारियों के अलावा बाजार बुनियादी ढांचा संस्थानों और प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के अधिकारियों को भी अच्छे इरादे से किए गए कार्यों के लिए कानूनी संरक्षण दिया जाए।
समिति की अन्य प्रमुख सिफारिश वर्चुअल डिजिटल संपत्ति को लेकर है। समिति ने कहा कि वर्चुअल डिजिटल संपत्ति को प्रस्तावित कानून से बाहर रखने से नियामकीय अस्पष्टता पैदा होगी।
समिति ने सरकार से क्रिप्टो परिसंपत्तियों के लिए व्यापक नियामकीय ढांचा तैयार करने पर विचार करने को कहा है जिससे निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके।
साथ ही, जब तक ऐसा कानून नहीं बन जाता, तब तक किसी मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठन के माध्यम से अंतरिम नियामकीय व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है।
समिति ने बाजार से जुड़े जटिल मामलों की जांच पूरी करने की समय सीमा प्रस्तावित 180 दिन से बढ़ाकर एक वर्ष करने की सिफारिश की है।
निवेशक संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समिति ने सेबी के लिए निवेशकों के अधिकार और शिकायत निपटान समयसीमा को बताने वाला ‘निवेशक चार्टर’ जारी करना अनिवार्य बनाने और प्रारंभिक शिकायत निपटान की समय सीमा 180 दिन से घटाकर 90 दिन करने का सुझाव दिया है।
भाषा रमण अजय
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