हॉकी स्टार मनप्रीत सिंह के आखिरी दो लक्ष्य : विश्व कप और लॉस एंजिलिस ओलंपिक

हॉकी स्टार मनप्रीत सिंह के आखिरी दो लक्ष्य : विश्व कप और लॉस एंजिलिस ओलंपिक

हॉकी स्टार मनप्रीत सिंह के आखिरी दो लक्ष्य : विश्व कप और लॉस एंजिलिस ओलंपिक
Modified Date: July 24, 2026 / 01:55 pm IST
Published Date: July 24, 2026 1:55 pm IST

(सौमोज्योति एस चौधरी)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा ) भारत के अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने अपने सुनहरे कैरियर में काफी कुछ हासिल किया लेकिन विश्व कप में पदक जीतने की अधूरी ख्वाहिश वह इस बार पूरी करना चाहते हैं और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 खेलना भी उनका लक्ष्य है ।

पूर्व कप्तान मनप्रीत ने तोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक, एशियाई खेल 2014 और 2022 में स्वर्ण और 2018 में कांस्य पदक जीते हैं ।

34 बरस के मनप्रीत विश्व कप में 51 साल से भारत को पदक नहीं मिलने की कमी पूरी करना चाहते हैं । उन्हें पूरा यकीन है कि बेल्जियम और नीदरलैंड में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले टूर्नामेंट से भारत खाली हाथ नहीं लौटेगा ।

मनप्रीत ने पीटीआई से कहा ,‘‘ एक खिलाड़ी कभी नहीं रूकता । मैं ज्यादा से ज्यादा समय खेलकर पदक जीतना चाहता हूं । ’’

उन्होंने कहा ,‘‘ हमने लगातार दो ओलंपिक में पदक जीते लेकिन विश्व कप पदक जीतना बाकी है । मैं 1975 के बाद से विश्व कप में पदक नहीं जीत पाने की कमी पूरी करना चाहता हूं । इस बार हम जरूर जीतेंगे । हम उसी मानसिकता के साथ खेलेंगे जिससे पिछले दो ओलंपिक में पदक जीते हैं ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ मेरी अपेक्षायें बड़ी हैं क्योंकि खिलाड़ी का कैरियर काफी छोटा होता है । आपको नहीं पता कि कल क्या होगा , चाहे आप 24 साल के हों या 35 के । कब कोई चोट लग जाये लिहाजा हर टूर्नामेंट को आखिरी समझकर खेलना चाहिये । पता नहीं विश्व कप के बाद क्या हो लेकिन मैं अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश करूंगा ।’’

हाल ही में दिलीप टिर्की का 412 मैचों का रिकॉर्ड तोड़कर भारत के लिये सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी बने मनप्रीत ने कहा ,‘‘ मेरा लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 है । इसके लिये मैं अपनी फिटनेस पर पूरा काम कर रहा हूं ।’’

विश्व कप की तैयारियों के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘हमारा पेनल्टी कॉर्नर काफी मजबूत है जिसमें हमारे पास हरमन, संजय, अमित रोहिदास है ।हमें अपना डिफेंस मजबूत रखना होगा और मुझे यकीन है कि हम गोल करने के मौके भी नहीं गंवायेंगे ।’’

भाषा मोना पंत

पंत


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