रायपुर। छत्तीसगढ़ पंचायत शिक्षक मोर्चा ने कहा है कि विसंगति दूर कर क्रमोन्नति के आधार पर सातवां वेतनमान के साथ संविलियन से शिक्षाकर्मियों को लाभ होगा। शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में क्रमोन्नति का प्रावधान है। वहां 12 वर्ष पूर्ण होते ही उच्च प्रवर्ग का वेतनमान मिलता है।
उन्होंने कहा कि मप्र में जुलाई 2010 से ही क्रमोन्नति का निर्धारण हो रहा है। क्रमोन्नति के आधार पर मिल रहे सातवें वेतनमान में मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मियो अधिक फायदा को होगा। उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ में भी क्रमोन्नति हो, समानुपातिक के आधार पर निर्धारण होना चाहिए। मोर्चा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में क्रमोन्नत वेतनमान बैक डेट प्रभाव से निरस्त हो चुका है।
यह भी पढ़ें : इसलिए उपचुनाव में आई थी ईवीएम में खराबी, जांच टीम ने चुनाव आयोग को दी रिपोर्ट
मोर्चा के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के वेतन का तुलनात्मक चार्ट प्रस्तुत कर बताया कि छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियो को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके मुताबिक
मध्यप्रदेश में 1998 में नियुक्त
वर्ग 01 को- प्राप्त वेतन – 48876
वर्ग 02 को- प्राप्त वेतन – 41406
वर्ग 03 को- प्राप्त वेतन – 37404
छत्तीसगढ़ में कार्यरत 1998 के
वर्ग 01 को – प्राप्त वेतन –39760
वर्ग 02 को – प्राप्त वेतन – 36912
वर्ग 03 को – प्राप्त वेतन – 26973
मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में अंतर
वर्ग 01– 9116
वर्ग 02– 4494
वर्ग 03– 10431
उन्होंने कहा कि इसी तरह 2005 व उसके बाद नियुक्त शिक्षाकर्मियो के वेतन में भी अंतर है। मोर्चा के प्रदेश उप संचालक हरेंद्र सिंह, देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रवीण श्रीवास्तव, विनोद गुप्ता, मनोज सनाढ्य, शैलेन्द्र पारीक, सुधीर प्रधान, प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक दुबे ने पूर्व में मोर्चा ने कमेटी को भी सुझाव दिया था। और अब भी कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश का वेतन, सातवां वेतनमान के पूर्व छत्तीसगढ़ से बहुत ज्यादा है। अतः समतुल्य (पुनरीक्षित) वेतनमान के विसंगति को दूर करते हुए बैक डेट प्रभाव से क्रमोन्नति, समानुपातिक के आधार पर वेतन निर्धारण पश्चात छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के वेतन मैट्रिक्स के आधार पर सातवें वेतनमान का निर्धारण करते हुए व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक के पद पर संविलियन किया जाए।
वेब डेस्क, IBC24