इस अस्पताल में बन रहे थे फर्जी अंधत्व सर्टिफिकेट, जांच पुलिस के हवाले

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इस अस्पताल में बन रहे थे फर्जी अंधत्व सर्टिफिकेट, जांच पुलिस के हवाले

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  • Publish Date - May 29, 2018 / 12:21 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:49 PM IST

इंदौर। अपनी लापरवाहियो के चलते विवादों में घिरे रहने वाले मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदौर के एमवाय में अब नया घोटाला सामने आया हैहां नेत्रहीनों के लिए बनाए जाने वाले सर्टिफिकेट्स में बड़ी धांधली सामने आई है नेत्र विभाग में बैठे बाबू ही बिना जांच कि नेत्रहीनता का प्रमाण-पत्र जारी कर रहे थे नेत्र विभाग के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ने घोटाला उजागर करते हुए इसकी शिकायत डीआईजी को की है। अब पुलिस मामले की जांच करेगी

एमवाय अस्पताल के नेत्र विभाग में नेत्रहीनों के लिए प्रमाण-पत्र जारी कि जाते हैं। ये प्रमाण-पत्र जारी करने का हक़ सिर्फ कंसल्टेंट डॉक्टर को ही है लेकिन ये प्रमाण-पत्र बिना कंसल्टेंट डॉक्टर के ही जारी किये जा रहे है कई प्रमाण-पत्रों में आवेदक के फोटो नहीं हैं तो कई में आवेदक के दस्तखत नहीं हैं।

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यही नहीं, कई आवेदक ऐसे हैं, जो पूरी तरह से देख सकते हैं। उसके बावजूद उनके भी अंधत्व के प्रमाण-पत्र बना दिए गए तीन महीने पहले ही नेत्र विभाग में विभागाध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर संजीव अग्रवाल ने ज्वाइन किया है अपने विभाग की जांच करते हुए उन्होंने यह पाया है

इस घोटाले के सामने आने के बाद डॉक्टर संजीव अग्रवाल इसकी शिकायत मयसबूत डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्र को करने पहुंचे शिकायत में डॉ अग्रवाल ने बताया है कि 500 से अधिक फर्जी ब्लाइंड सर्टीफिकेट जारी हो चुके हैं जाली सर्टीफिकेट की कॉपी डीआईजी को दिखाते हुए उन्होने कहा कि ये गोरखधंधा सालों से चल रहा है और सर्टीफिकेट बनाने के काम जिम्मा नेत्र रोग विभाग के बाबू शैलेन्द्र बजाज के पास हैइस गंभीर मामले की शिकायत के बाद डीआईजी मिश्र ने सीएसपी कोतवाली को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है डीआईजी का कहना है कि वे मामले की जांच करा रहे हैं और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

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ब्लाइंड सर्टीफिकेट बनवाने का पीछे लोगों का मकसद सरकार की योजनाओं का लाभ लेना होता हैब्लाइंड व्यक्ति और उसके सहयोगी को ट्रेन में फ्री यात्रा के साथ ही पेंशन, नौकरी में आरक्षण समेत सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ तो मिलता ही है, साथ उन्हें इनकम टैक्स के दायरे से भी बाहर रखा गया है यही कारण है कि लोग ब्लाइंड सर्टीफिकेट हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने का तैयार रहते है और इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आते हैं।

वेब डेस्क, IBC24