(Suzlon Share Price today/ Image Credit: Meta AI)
नई दिल्ली: Suzlon Energy Share Price: पवन ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। आज सोमवार 2 मार्च को सुजलॉन के शेयर में करीब 8.3% की गिरावट आई और यह 40 रुपये से नीचे फिसलकर 39.13 रुपये के इंट्रा-डे लो लेवल पर पहुंच गया, जो मई 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, खासकर क्योंकि कंपनी में रिटेल निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी है।
सुजलॉन के शेयर में गिरावट की शुरुआत जून 2025 से हुई थी, जो अब एक लंबी करेक्शन में बदल चुकी है। पिछले साल सितंबर 2024 में 86 रुपये के शिखर से यह शेयर अब लगभग 50% से अधिक टूट चुका है। पिछले नौ महीनों में से आठ महीनों में स्टॉक लाल निशान में बंद हुआ है और कुल मिलाकर करीब 40% की गिरावट देखी गई है। कैलेंडर ईयर 2025 में भी शेयर 15% से ज्यादा गिरा, जो पांच साल में इसकी पहली सालाना गिरावट थी।
कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजे बाजार के अनुमान के मुताबिक रहे, लेकिन निवेशकों का भरोसा पूरी तरह से नहीं लौट पाया है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी को प्रोजेक्ट कमीशनिंग बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। जमीन अधिग्रहण, राइट ऑफ वे (RoW) और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं सुजलॉन के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई है। इसके अलावा, हाल ही में कंपनी ने बड़ा मैनेजमेंट बदलाव किया है, जिसमें अजय कपूर को नया सीईओ नियुक्त किया गया है।
| विवरण | आंकड़ा |
| मौजूदा भाव | ₹40.95 |
| आज की गिरावट | ₹-1.72 (-4.03%) |
| ओपन | ₹39.13 |
| हाई | ₹41.79 |
| लो | ₹39.13 |
| मार्केट कैप | ₹56.15KCr |
| P/E रेशियो | 17.42 |
| 52 हफ्ते का हाई | ₹74.30 |
| 52 हफ्ते का लो | ₹39.13 |
| डिविडेंड यील्ड | – |
| तिमाही डिविडेंड राशि | – |
ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि केवल नेतृत्व में बदलाव से हालात नहीं सुधरेंगे। उनका कहना है कि कंपनी में कई हाई-प्रोफाइल अधिकारियों की एंट्री से ग्रुप डायनामिक्स बिगड़ सकते हैं, जिससे विंड टरबाइन जेनरेटर (WTG) मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कमजोर हो सकता है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए डिलीवरी अनुमान घटा दिए हैं, लेकिन फिर भी ‘Buy‘ रेटिंग के साथ 64 रुपये का टारगेट दिया है।
कुल मिलाकर, सुजलॉन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन पर प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने की है। पवन ऊर्जा सेक्टर में जमीन, पीपीए, लागत और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। जब तक डिलीवरी के मुकाबले कमीशनिंग की रफ्तार नहीं बढ़ती, तब तक शेयर में स्थिरता आना मुश्किल दिख रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात टिकी हुई है कि कंपनी जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से सुधार ला पाती है।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।