लखनऊ, 12 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक शिक्षिका के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के व्यवहार को लेकर बुधवार को कहा कि ‘‘राष्ट्र निर्माता’’ माने जाने वाले शिक्षक को इतनी लंबी सेवा के बाद खुद के हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। शिक्षिका ने अनुबंध के आधार पर 16 वर्षों तक सेवाएं दी थीं, लेकिन उनके अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि यह मामला अनुबंधित अध्यापकों से जुड़े एक व्यापक मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करता है।
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने राज्य सरकार को अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) का एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें यह बताने को कहा गया कि क्या 15 वर्षों से अधिक समय से अनुबंध पर काम कर रहे अध्यापकों को नियमित करने के लिए कोई कदम उठाए जा रहे हैं।
पीठ ने अधिकारियों को अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता अर्चना बोध को उस पद पर काम जारी रखने की अनुमति देने का भी आदेश दिया।
अमेठी में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कार्यरत बोध के अनुबंध का 16 जून, 2026 को जारी आदेश के तहत नवीनीकरण नहीं किया गया, जबकि वह 16 जनवरी, 2010 से काम कर रही थीं।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी आयु अब करीब 39 वर्ष हो चुकी है और अब वह स्कूलों में अध्यापक के पदों के लिए नए सिरे से आवेदन करने की पात्र नहीं हैं जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है खासकर तब जब याचिकाकर्ता 16 वर्षों से सेवारत रही है। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए आठ सितंबर की तारीख तय की।
भाषा सं. राजेंद्र गोला
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