फर्रुखाबाद: Namaz Ban in Masjid While Ramadan देश भर में इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है। वहीं दूसरी ओर बोर्ड कक्षाओं की परीक्षाएं भी आयोजित की जा रही है। परीक्षाओं को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल प्रशासन ने फर्रुखाबाद जनपद के फतेहगढ़ स्थित म्युनिसिपल इंटर कॉलेज परिसर में स्थित मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है।
Namaz Ban in Masjid While Ramadan रमजान के दौरान नमाज पढ़ने पर रोक लगाए जाने को लेकर अधिकारियों ने कहा है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान कोई व्यवधान उतपन्न न हो इसलिए यह व्यवस्था की गई है। परीक्षा के दौरान के व्यवधान उतपन्न करने पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। जिलाधिकारी केमुताबिक जब तक बोर्ड परीक्षाएं संचालित हो रही है तब तक यह रोक जारी रहेगी।
उधर मुस्लिम पक्ष ने डीएम से मिलकर मस्जिद में नमाज पढ़ने की गुहार लगाई है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे रिजवान अहमद ने बताया कि आजादी से पहले यह मस्जिद म्युनिस्पल इंटर कॉलेज में बनी हुई है। यहां रमजान में नमाज और तराबी की जाती रही है। 24 तारीख को प्रधानाचार्य ने कहा कि यहां स्ट्रांग रूम बना है, इसलिए नमाज नहीं हो सकती। इसके बाद कोतवाल साहब आए तो उन्होंने कहा कि डीएम साहब से लिखवा कर दे दीजिए, जिसके बाद हमने डीएम साहब से मिलकर 21 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी गई है।
फर्रुखाबाद में नमाज पढ़ने पर क्यों रोक लगाई गई है?
प्रशासन ने बोर्ड परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार का व्यवधान न उत्पन्न होने के कारण फर्रुखाबाद के म्युनिसिपल इंटर कॉलेज परिसर स्थित मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज पढ़ने पर रोक लगाई है।
रोक लगने के बाद मुस्लिम पक्ष ने क्या कदम उठाए?
मुस्लिम पक्ष ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति देने की मांग की। रिजवान अहमद की अगुवाई में डीएम से 21 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी गई।
कितना जुर्माना लगाया जाएगा यदि परीक्षा में व्यवधान उत्पन्न होता है?
यदि बोर्ड परीक्षा के दौरान कोई व्यवधान उत्पन्न होता है, तो 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह रोक कब तक लागू रहेगी?
यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं।
क्या मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिकार था?
मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिकार था, क्योंकि यह मस्जिद आजादी से पहले से म्युनिसिपल इंटर कॉलेज परिसर में बनी हुई है, और यहां रमजान में नमाज और तरावीह होती रही है।