नौकरशाही की आलोचना के मामले में राज्यपाल पूरी तरह सही, समस्या व्यवस्था में: असीम अरुण

नौकरशाही की आलोचना के मामले में राज्यपाल पूरी तरह सही, समस्या व्यवस्था में: असीम अरुण

नौकरशाही की आलोचना के मामले में राज्यपाल पूरी तरह सही, समस्या व्यवस्था में: असीम अरुण
Modified Date: July 19, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: July 19, 2026 8:35 pm IST

लखनऊ, 19 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मंत्री और पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी असीम अरुण ने राज्य की स्कूटी योजना के क्रियान्वयन को लेकर नौकरशाही की आलोचना करने के मामले में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का रविवार को समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर उनकी चिंताएं ‘‘पूरी तरह जायज’’ हैं।

अरुण ने प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की भी मांग की।

अरुण की यह टिप्पणी राज्यपाल पटेल के उस बयान के कुछ दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने छह जुलाई को अलीगढ़ स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के नियम बनाने में देरी पर सवाल उठाया था और पात्रता संबंधी शर्तों को ‘‘अव्यावहारिक’’ बनाने के लिए अधिकारियों की आलोचना की थी।

समाज कल्याण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रशासनिक व्यवस्था और आईएएस अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर उनका आक्रोश, चिंता और खरी बातें पूरी तरह जायज हैं। मैं उनके विचारों से सौ प्रतिशत सहमत हूं।’’

उन्होंने कहा कि जब तक सरकारी नीतियां ‘‘केवल कागज पर खूबसूरत दिखेंगी और जमीन पर लागू करने लायक व्यावहारिक नहीं होंगी’’, तब तक जनकल्याण का वास्तविक उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सकता।

अरुण ने व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि भारतीय नौकरशाही के प्रसिद्ध ‘‘स्टील फ्रेम’’ पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का समय आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह विकसित भारत के लिए अब भी उपयुक्त है या इसे ‘‘कार्बन फाइबर जैसे अधिक लचीले, तेज और जवाबदेह ढांचे’’ से बदलने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि समस्या व्यक्तियों के बजाय व्यवस्था में है और आदर्श नौकरशाही का आकलन कुछ चुनिंदा अधिकारियों के बजाय मजबूत संस्थागत तंत्र के आधार पर किया जाना चाहिए।

अरुण ने जवाबदेही बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग सिविल सेवाओं के लिए अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने, संबंधित क्षेत्रों में अधिक विशेषज्ञता विकसित करने, पसंद के आधार पर पदस्थापना और ‘लेटरल एंट्री’ का व्यापक इस्तेमाल करने तथा निश्चित कार्यकाल वाली नियुक्तियों की भी वकालत की।

पटेल ने अलीगढ़ में अपने संबोधन के दौरान कहा था कि ‘‘मुख्यमंत्री योजना की घोषणा करके और बजट उपलब्ध कराकर अपना काम कर देते हैं’’, लेकिन उसके क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक नियम बनाना आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्कूटी योजना का जिक्र करते हुए कहा था, ‘‘नियम नहीं बनाए गए। आपने एक साल तक क्या किया?’’

पटेल ने कहा था कि जब उन्हें पता चला कि पात्रता केवल 90 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थियों तक सीमित कर दी गई है, तो उन्होंने अपर मुख्य सचिव को फोन किया।

उन्होंने इस मापदंड पर सवाल उठाते हुए कहा था, ‘‘मुझे बताइए, यह किसे मिलेगा? क्या किसी दूरदराज के गांव का बच्चा इतने अंक ला सकता है? या यह उन शहरी विद्यार्थियों को मिलेगा जो निजी स्कूलों में पढ़ते हैं और जिन्हें कोचिंग की सुविधा मिलती है?’’

उन्होंने कहा था कि योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलना चाहिए जो पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करते हैं, न कि उन्हें जिनके पास पहले से बेहतर संसाधन उपलब्ध हैं।

राज्यपाल ने यह भी कहा था कि अधिकारियों को उपलब्ध बजट के आधार पर लाभार्थियों की सूची तैयार करनी चाहिए, ताकि सहायता सबसे पहले सबसे अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचे और इसका फैसला केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर न किया जाए।

भाषा सलीम सिम्मी

सिम्मी


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