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Mohaba Bribery Case: मोहाबा: महोबा जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है, जहां मूल तैनाती पर पोस्टिंग कराने के नाम पर रिश्वत लेने का खेल चल रहा था। इस मामले में परिवार कल्याण विभाग के प्रोजेक्ट मैनेजर को झांसी विजिलेंस टीम ने रंगे हाथों दो लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है और इस घटना ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, कस्बा चरखारी निवासी मेराज खान, जो स्वास्थ्य विभाग में ब्लॉक अकाउंट मैनेजर के पद पर तैनात हैं, लंबे समय से अपनी मूल तैनाती सीएचसी कबरई में वापसी के लिए प्रयास कर रहे थे। वर्ष 2010 में उनकी नियुक्ति कबरई में हुई थी, लेकिन अगस्त 2024 में उन्हें सीएचसी पनवाड़ी से संबद्ध कर दिया गया। इस बदलाव के बाद से ही वे अपनी मूल पोस्टिंग के लिए परेशान थे। इसी दौरान सीएमओ कार्यालय में कार्यरत परिवार कल्याण के प्रोजेक्ट मैनेजर जीतेश सोनी ने उनसे संपर्क साधा और खुद को “साहब का माध्यम” बताते हुए पोस्टिंग कराने का भरोसा दिलाया।
मेराज खान का आरोप है कि जीतेश सोनी ने पहले साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की, लेकिन बाद में सौदा दो लाख रुपये में तय हो गया। रिश्वत की मांग से परेशान होकर मेराज ने लगभग एक महीने पहले झांसी विजिलेंस टीम से शिकायत की। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार की शाम जीतेश सोनी ने मेराज को बाइक एजेंसी के सर्विस सेंटर के एक केबिन में पैसे लेकर बुलाया, जहां पहले से ही विजिलेंस टीम नजर रखे हुए थी।
जैसे ही मेराज ने आरोपी को दो लाख रुपये दिए, उसी समय 12 सदस्यीय विजिलेंस टीम ने प्रभारी पीयूष पांडेय और सोनू राजपूत के नेतृत्व में छापा मार दिया और जीतेश सोनी को मौके पर ही रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को सदर कोतवाली लाया गया, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पीसी कोर्ट (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन) भ्रष्टाचार निवारण इकाई बांदा में पेश किया जाएगा।
Mohaba Bribery Case में एक और पहलू सामने आया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशाराम ने बताया कि शिकायतकर्ता मेराज खान के खिलाफ भी पहले से भ्रष्टाचार से जुड़ी कई शिकायतें थीं। इसी कारण उसे कबरई से हटाकर पनवाड़ी में संबद्ध किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि करीब एक साल पहले मेराज उनके पास आया था, लेकिन उस समय उसे वापस भेज दिया गया था।
गौरतलब है कि महोबा जिले में अब तक 16 लोगों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा चुका है, जिससे साफ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। इस ताजा घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को फिर से उजागर कर दिया है।