जासूसी के मामले में सजा काट चुके पाकिस्तानी नागरिक को स्वदेश भेजा गया

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जासूसी के मामले में सजा काट चुके पाकिस्तानी नागरिक को स्वदेश भेजा गया

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 02:56 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 02:56 PM IST

सहारनपुर, 17 फरवरी (भाषा) जासूसी से जुड़े मामले में अपनी सजा पूरी कर लेने वाले पाकिस्तानी नागरिक इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल को सोमवार रात कड़ी सुरक्षा में पाकिस्तान वापस भेज दिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अपर पुलिस अधीक्षक मनोज यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “इकबाल का सोमवार रात सहारनपुर जिला अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण किया गया। इसके बाद मंगलवार सुबह उसे पंजाब में वाघा सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया।”

इकबाल जासूसी के मामले में गौतमबुद्ध नगर जिला जेल में 17 साल तक कैद था। उसकी सजा 11 महीने पहले खत्म हो गई थी, जिसके बाद उसे 22 मार्च 2025 को रिहा कर दिया गया था और तब से वह कड़ी सुरक्षा में सहारनपुर हिरासत केंद्र में था। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद उसे सोमवार रात सहारनपुर से पाकिस्तान वापस भेज दिया गया।

यादव ने बताया कि इकबाल साल 2008 में सदर बाजार थाना क्षेत्र के हकीकत नगर इलाके में किराये के मकान में रह रहा था और उसने इसी पते पर जाली कागजात के जरिये मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और राशन कार्ड बनवा लिए थे।

यादव के मुताबिक, इकबाल ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में खाता भी खुलवा लिया था। हालांकि, बैंक के मुख्य प्रबंधक ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।

यादव के अनुसार, मामले की जांच के आधार पर इकबाल के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि वह भारत में देवराज सहगल के नाम से रह रहा था और पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था।

यादव ने बताया कि इकबाल को जासूसी और जालसाजी से जुड़े मामलों में 17 साल की सजा सुनाई गई थी।

उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस ने 2008 में इकबाल को पंजाब के पटियाला से गिरफ्तार किया था।

यादव के मुताबिक, जब पंजाब पुलिस इकबाल को सहारनपुर लाई, तो सच सामने आ गया कि वह पाकिस्तान को भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भेज रहा था और उसके पास से कुछ नक्शे भी मिले थे।

उन्होंने बताया कि सजा पूरी होने के बाद इकबाल ने न्यायाधीश के सामने खुद को पाकिस्तान भेजे जाने की इच्छा जताई थी।

भाषा

सं. सलीम मनीषा पारुल

पारुल